Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 2

Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 2

Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple कहानी के पहले भाग में आपने पढ़ा कि एक मशहूर कंपनी सुपीरियर टेक के मालिक प्रकाश बंसल के बेटे को जान से मारने की धमकी मिलती है। अमेरिका में रह रहें अपने बेटे को बचाने और अपने प्रतिद्वंदी चौधरी का ध्यान बांटने के लिए वो कंपनी की बागडोर किसी और को थामना चाहते हैं । इसलिए वो उसकी शादी अन्विका से करवा देते हैं।

अब इंडिया में रहकर अन्विका को SEO की पोस्ट संभालनी थी। उसके सेक्रेटरी के तौर पर विक्रांत को नियुक्त किया गया था। लेकिन अन्विका और विक्रांत की आपस में अक्सर बहस हो जाती है । विक्रांत को बिजनेस का हर टर्म पता है और अन्विका मेडिकल कॉलेज से निकली हुई लड़की है तो उसे विक्रांत पर निर्भर भी रहना पड़ता है। अब आगे –

अन्विका को रात में अब देर तक जागने की आदत हो गई है महीने भर से । ऐसा नहीं है कि कोई काम करना पड़ता हो , बस आँखों में नींद ही आती है देर में । जितनी देर तक जगती है इस आलीशान फ्लैट की छत को देखते हुए अपनी मिडिल क्लास जिंदगी याद करती है। कभी- कभी मेडिकल की किताबें उठाकर पढ़ने की कोशिश करती है तो कभी मयंक की तस्वीर देखते हुए रोने लगती है।

Power Couple

6 महीने कंप्लीट हो गएं हैं उसकी ट्रेनिंग को अब 6 महीने बाद वो IAS बनकर उसके सामने आएगा । कितना गर्व का दिन होगा उसके लिए …! लेकिन वो उसके सामने आएगा ही क्यों ? इस शादी से उससे भी ज्यादा दुखी जो इंसान हैं वो उसका छोटा भाई मयंक ही है।

“दीदी तुमने एक भगोड़े से शादी कर ली ? ऐसी क्या मजबूरी थी जो तुमने अपने बारे में एक बार भी नहीं सोचा । अरे कम से कम मुझे तो खबर करती मैं आता तुम्हारे लिए । मैं ट्रेनिंग पर था दीदी कोई बॉर्डर पर नहीं जो अपनी बड़ी बहन के बुलाने पर न आ सकता ।”

वो आखिरी कॉल थी मयंक की उस दिन जो दोनों के बीच गर्मागर्मी हुई तब से बात हो बंद हो गई है वरना रोज शाम को एक घंटे बात करते थे दोनों । उसकी सबसे खास दोस्त ने भी आखिरी कॉल पर उसे ही भला बुरा सुनाया था । उसे लगता है कि अगर वो थोड़ी भी खास होती अन्विका के लिए तो उसे इस Love Story के बारे में पहले से ही पता होता ।

बाकी की जान पहचान वाले लोग उसकी पॉवर और पैसे के नीचे दब गएं हैं। बस एक दानियाल सर ही है जिन्होंने उसे कुछ नहीं कहा । हॉस्टल से निकलते वक्त मिलने भी आएं थें उससे ।

” जहाँ भी जा रही हो खुश रहो । मुझे लगता तो नहीं है कि अब तुम्हें किसी भी चीज की जरूरत पड़ेगी लेकिन अगर कभी पड़ती है तो बेझिझक मुझे कॉल कर लेना ।” उस दिन उन्होंने अपना फोन नंबर उसके फोन में सेव किया था ।

इससे पहले अन्विका ने कई बार कॉल किया था उन्हें लेकिन उन्होंने कभी उसके नंबर पर ध्यान नहीं दिया था । उन्होंने एक जूनियर और सीनियर के बीच की मर्यादा को बरकरार रखा । अन्विका ने भी उनका नंबर सेव नहीं किया था अब तक क्योंकि उसे जुबानी याद हो गया था ।

नंबर सेव करने के बाद उन्होंने अन्विका को फोन वापस कर दिया । फोन देते वक्त उनके हाथों में कंपकपी से महसूस हो रही थी।
“डॉक्टर दानियाल! ” इस नंबर पर कॉल करने की हिम्मत अन्विका को एक महीने से हुई ही नहीं ।

अन्विका हमेशा सोचती थी कि अपना MBBS complete करने के बाद वो दानियाल सर के अंडर ही प्रैक्टिस करेगी तब तक तो उनका भी MS हो जाता , वो उसे भी MS की तैयारी करवा देते ….!

हा…! कुछ नहीं हुआ ! वो कुछ नहीं कर सकी अपने लिए। अन्विका बेड से उतर कर नीचे फर्श पर आकर लेट गई । शायद अब उसकी overthinking बंद हो जाए और वो थोड़ी देर सुकून से सो पाए ।

कल की मीटिंग कैसी गई ? विक्रांत उसके लिए कॉफी लेकर आया था ।

हाँ ठीक थी । उन्होंने मुझसे कहा कि मैं सीख रही हूँ आगे और बेहतर हो जाऊंगी । अन्विका ने कॉफी उठा ली ।
आपका काम तो हो गया अब आप मुझे मेरे सवाल का भी जवाब दे दीजिए । आपने मुझे घटिया क्यों बोला था ?
क्योंकि तुम घटिया हो इसलिए बोला था ।

कहाँ से घटिया हूँ, कैसे घटिया हूँ, ये कुछ तो आप बता नहीं रही बस एक ही बात की रट लगा रखी है कि “तुम घटिया हो ” अरे भई क्यों घटिया हूँ मैं ? विक्रांत कुर्सी खींच कर बैठ गया ।

विक्रांत प्लीज जाओ यहाँ से दुनिया भर की गुस्सा भरी है मेरे अंदर कहीं सब तुम पर ही न निकाल दूँ।
तो निकाल दो इसके बाद कम से कम खुश तो रह पाओगी ।

तुम क्यों मेरे खुश रहने के पीछे पड़े हो ? तुम्हें क्या मिल जाएगा मेरी खुशी से …!
सुकून …! उसकी बात पूरी होते ही विक्रांत बोल पड़ा।

तुम मुझसे ऐसी बातें मत किया करो मुझे सख्त चिढ़ हो जाती है।
तो कैसी बातें करूं ?

तुम बातें ही मत किया करो यही अहसान होगा मुझपर ।
नहीं करूंगा लेकिन जो पूछा है वो तो बता तो ।

जाओ नहीं बताऊंगी क्या कर लोगे ? अन्विका कुर्सी से उठ खड़ी हुई । बॉडी गॉर्ड तुरंत कमरे के कोने से हटकर थोड़ा नजदीक आ कर खड़ा हो गया ।
मैम.. ! अंदर आ जाऊं ? पवन ने दरवाजे पर नॉक किया।

हाँ आ जाओ । वो दोबारा कुर्सी पर बैठ गई ।
मैम मैं बाद में आता हूँ । कहकर विक्रांत खड़ा हुआ और उसे देखते हुए बाहर चला गया ।

“एड कहाँ और कैसे भेजे जाएंगे ” इस बात को लेकर ऑफिस में एक मीटिंग बुलाई गई । सबने अपनी तरफ से कुछ न कुछ सुझाव दिए । किसी को लग रहा था कि रेडियो बेहतर रहेगा तो कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म की बात कर रहा था। COO का मानना था कि न्यूजपेपर सबसे सटीक रहेगा हर घर तक पहुंच बनाने के लिए । विक्रांत भी उनकी बात से सहमत हुआ ।

तो फिर हम अपने ज्यादातर एड लोकल न्यूजपेपर्स में देंगे। अन्विका ने सबकी बात सुनने के बाद कहा ।

लोकल न्यूजपेपर्स में क्यों ? हमें नेशनल लेवल के न्यूजपेपर्स को कनेक्ट करना चाहिए । विक्रांत ने उसकी बात से असहमति जताई ।

हमें सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों या मेट्रो सिटीज को कवर नहीं करना है। हमें आम लोगों के दिमाग तक पहुंचना है और आम लोग आपकी तरफ सुबह उठते ही महंगे अंग्रेजी अखबार के आदि नहीं हैं। उम्मीद है आपको कुछ समझ आया होगा । अन्विका ने कुर्सी से उठते हुए कहा । उसके उठते ही बाकी सब भी अपनी जगह से उठ खड़े हुए । सबसे आगे अन्विका निकली उसके पीछे विक्रांत फिर बाकी सब मीटिंग रूम से बाहर निकले ।

ये क्या था ? लिफ्ट में पहुंचते ही विक्रांत ने अन्विका से सवाल पूछा ।
मीटिंग थी और क्या था ?

हाँ मीटिंग तो थी लेकिन मीटिंग में मेरी बेइज्जती करने की कोई जरूरत नहीं थी । तुम अगर चाहती तो यही बात मुझे बाद में भी समझा सकती थी वहाँ मेरी तरफ इशारा करने की कोई जरूरत ही नहीं थी । विक्रांत उसके सामने हाथ बांध कर खड़ा हो गया ।

मिस्टर विक्रांत आजकल तुम अपनी हदें बहुत भूलने लगे हो और ये चीज बिल्कुल भी अच्छी नहीं है तुम्हारे लिए । वैसे अच्छा लगा जानकार की तुम्हें बेइज्जती भी महसूस होती है आगे से इस बात का खास खयाल रखूंगी कि जब भी तुम्हारी बेइज्जती करूं कोई न कोई देखने वाला जरूर हो ।
इतनी देर में लिफ्ट खुल चुकी थी तो अन्विका उसे घूरते हुए बाहर निकल आई ।

अन्विका विक्रांत से बचने के लिए ज्यादातर संगीता को अपने साथ रखने लगी । संगीता विक्रांत की असिस्टेंट है उसे इतना ज्यादा चीजें नहीं पता जितना विक्रांत जानता है लेकिन फिर भी वो अन्विका से ज्यादा जानती समझती है। केबिन में जितनी बार भी विक्रांत ने एंट्री ली है उतनी बार संगीता अन्विका को कुछ न कुछ बताते हुए ही दिखाई दी है।

सब कुछ करने के बाद फाइल पवन के हाथों विक्रांत के केबिन में पहुंचा दी जाती है।
डॉक्यूमेंट्स चेक करने के बाद विक्रांत फाइल वापस अन्विका के पास आ जाती है सिग्नेचर करने के लिए ।

किसी भी मीटिंग में शामिल होने के लिए उसे अभी भी विक्रांत की ओर देखना पड़ता है। लेकिन लिफ्ट में वो कभी भी विक्रांत के साथ अकेली नहीं जाती , कभी मिराज तो कभी वैभव तो कभी कंपनी के COO को ही साथ चलने के लिए बुला लेती है।

वो किसी भी तरह न तो अकेले में विक्रांत से बात करना चाहती है और न उसकी शकल ही देखना चाहती है। साथ में काम करने की मजबूरी न होती तो मीटिंग में भी प्यार से बात न करती उससे ।

ऑफिस में बात करने का मौका न मिल पाने पर विक्रांत ने उसे फोन कॉल किया । पहली बार में अन्विका ने कॉल रिसीव भी की थी लेकिन विक्रांत की आवाज सुनते ही कॉल काट दी और नम्बर भी ब्लॉक कर दिया ।

दो हफ्तों तक यही सब चलता देखकर विक्रांत इतना  परेशान हो गया कि संगीता का डिपार्टमेंट ही चेंज कर दिया ।

संगीता …मेरी कॉफी …! कुर्सी पर बैठते ही उसने आवाज लगाई । उसे पता है कि संगीता उसके आते ही पीछे-पीछे दौड़ती आ जाती है।
संगीता अब आपकी सेवा में नहीं है मैम! विक्रांत कॉफी लेकर अंदर आया ।
तुम ? संगीता कहाँ हैं?

आपको कॉफी से मतलब है या की संगीता से ? विक्रांत ने कॉफी टेबल पर रखते हुए पूछा ।
हाँ ठीक है मुझे बस कॉफी चाहिए थी अब तुम जा सकते हो ।

और अगर न जाना चाहूँ तो ? विक्रांत बहुत दिनों बाद आज फिर कुर्सी पर बैठ गया ।
हाँ तो मत जाओ । अन्विका ने किसी को कॉल लगाते हुए कहा था ।
हाँ मिराज ! वो नीले कवर वाली फाइल लेकर आना जरा।

“लेकिन वो तो दोपहर तक देनी थी ।”
सबमिट बाद में करना लेकिन मुझे बस एक बार दिखा दो आकर ।
Ok Mam !

मुझे इग्नोर कर रही हो ?
नहीं अपना काम कर रही हूँ। तुम्हें भी अपना काम करना चाहिए ।

आप जितना भागने की कोशिश करना चाहती हैं करें बस इतना याद रखे कि मंजिल पर मैं ही खड़ा मिलूंगा । विक्रांत कुर्सी से उठ गया ।
विक्रांत तो चला गया था लेकिन उसकी बातें अभी भी अन्विका के कानों में गूंजती रहीं । गुस्से से उसका पूरा बदन दहक रहा था ।

अपना गुस्सा किसी न किसी तरह वो निकालना चाहती थी । वो चाहती थी कि विक्रांत भी ऐसी ही गुस्सा महसूस करे और फिर भी कुछ न कर पाए ।

उसने पवन के हाथों कई सारी फाइल्स विक्रांत के पास भिजवा दी । मिराज से कह कर ईमेल्स भी उसे भेज दिए।

विक्रांत ने सिर्फ उन्हीं डॉक्यूमेंट्स पर गौर किया जो जरूरी थें और आज की मीटिंग में जिनकी जरूरत पड़ती। उसने बिल्कुल सोचा ही नहीं कि अन्विका अचानक से उसे क्यों इतना उलझना चाहती थी ।

मीटिंग शुरू होने से पहले विक्रांत ने अन्विका की सीट पर डॉक्यूमेंट्स रख दिए थे और खुद उसके पास वाली सीट पर बैठ कर दूसरी फाइल्स देखने लगा था ।

ये क्या है ? कुर्सी पर बैठते ही सबकी तरफ देखने की बजाय अन्विका ने सिर्फ फाइल्स को देखा।
माइक्रोचिप्स की फाइल है मैम ।

और बाकी की फाइल्स ?

उनका आज की मीटिंग में कोई काम नहीं था इसीलिए…

तुम लोगों को कोई बीमारी है क्या अपने सीनियर्स की बात न मानने की । तुम्हें दिखाई भी पड़ रहा है कितनी अहम मीटिंग चल रही है और तुम बोल रहे हो कि बाकी डॉक्यूमेंट्स की क्या जरूरत है ? जब तक एक- एक पॉइंट क्लियर नहीं होगा तब तक बात आगे कैसे बढ़ेगी? सच में इतने आलसी हो तुम कि एक काम भी ढंग से नहीं कर पाते हो । तुमसे अच्छे तो तुम्हारे जूनियर्स हैं जो डेडलाइन से पहले ही अपना काम कर देते हैं उनसे सीखो कुछ …..!

चलती मीटिंग में अन्विका बहुत देर तक विक्रांत को फटकारती रही और वो चुपचाप अपना सर झुका कर सुनता रहा । SEO मैडम इतना कठोर और तेज भी बोल सकती हैं, ये पहली बार बाकी कर्मचारियों को समझ आया था ।

मीटिंग खत्म होते ही विक्रांत वहाँ से निकल गया । उसके जाने के थोड़ी देर बाद वैभव और पवन को साथ लेकर अन्विका लिफ्ट में गई । वो बहुत चौकन्नी हो गई थी कि कहीं उसका आमना सामना विक्रांत से न हो जाएं। अपने केबिन तक वो पवन के साथ आई । पवन केबिन के बाहर ही उसे छोड़कर अपनी डेस्क पर चला गया ।

केबिन के अंदर पैर रखते ही उसे अपनी कुर्सी पर विक्रांत बैठा दिखाई दिया । उसके मन में आया कि वो तुरंत यहाँ से भाग जाए लेकिन अगर भागेगी तो विक्रांत बाद में उसका मजाक बनाएगा । फिर भागते वो लोग है जिन्होंने गलत किया हो, उसने तो कोई गलती नहीं की है। अन्विका थोड़ा हिम्मत करके आगे बढ़ी और एक कुर्सी खींचकर टेबल के इधर ही बैठ गई ।

गॉर्ड..! आज से तुम्हारी ड्यूटी भी बाहर ही लगेगी । विक्रांत ने थोड़ा ऊंची आवाज में कहा ।
क्यों ? बाहर क्यों लगेगी ? मुझे इनकी जरूरत यहाँ भी पड़ सकती है। कमल भैया आप यहाँ से कहीं नहीं जा सकते हैं मेरा ऑर्डर होने तक ।

चले जाते तो तुम्हारे लिए ही बेहतर होता ।
मेरी बेहतरी की फिक्र तुम न करो फिलहाल तो अपना  सोचो । इस वक्त जिस जगह तुम बैठे हो वहाँ होना नहीं चाहिए था तुम्हें ।

विक्रांत उस कुर्सी से उठ गया और अन्विका के सामने आकर खड़ा हो गया । उसे थोड़ी देर देखते रहने के बाद उसने कुर्सी को दोनों तरफ से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया फिर अन्विका के डरे हुए चेहरे पर अपना चेहरा झुकाते हुए उसने कहा –

मुझे मेरा हक लेना आता है । जब चाहूं तब मैं अपना अधिकार ले सकता हूँ और तुम मुझे रोक भी नहीं पाओगी। बस यही बताने आया था तुमको । वो सीधे खड़ा हो गया । उसके खड़े होते ही अन्विका तेजी से कुर्सी से उठ कर साइड में चली गई।

…और हाँ ये बात मैंने उस कुर्सी के लिए नहीं कही है । जाते वक्त उसने अन्विका के बदन पर भरपूर निगाह डाली ।

Wait for next part
Thanks for Reading……..

Read more stories like this…..