Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 3
Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 2 आपने पढ़ा कि अन्विका मजबूरी में SEO तो बन जाती है लेकिन उसे ये काम बिल्कुल पसंद नहीं आता है। ऑफिस में विक्रांत का उसके करीब आना भी उसे बिल्कुल भी नहीं अच्छा नहीं लगता है। विक्रांत से बचने के लिए वो दूसरी इंटर्न संगीता से काम लेने लगती हैं, लेकिन विक्रांत उसे दूसरे डिपार्टमेंट में शिफ्ट कर देता है। विक्रांत से चिढ़ जाने के कारण अन्विका मीटिंग्स में उसकी बेइज्जती करने लगती है।
एक मीटिंग में उसे कामचोर और आलसी तक बोल देती है। वो उस वक्त तो चुप रह जाता है लेकिन जैसे ही अन्विका मीटिंग खत्म करके केबिन में आती है उसे विक्रांत बैठा मिलता है और बहुत गुस्से में उससे कहता है कि “उसे अपना हक लेना अच्छे से आता है।” इतना कहकर वो केबिन से निकल जाता है। अब आगे –
- Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 1
- Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 2
फ्लैट जाने के बीच रास्ते से ही गाड़ी को बंसल हाऊस की तरफ घुमा लिया गया । अचानक से ऐसा होने पर पर अन्विका थोड़ा परेशान हुई । इस मुलाकात के विषय में न उससे पूछा गया था और न बताया ही गया था।
वहाँ पहुंचने के दस मिनट के अंदर मधुर भी पहुंच गई। जिस वक्त मधुर पहुँची उस समय अन्विका सर झुकाए प्रकाश बंसल के आगे खड़ी थी ।
तुम यहाँ इस वक्त ? बंसल साहब ने अपने गुस्से को काबू में करने की कोशिश की।
सर ने भेजा है मैम को ले जाने के लिए । उन्होंने कहा है मैं 5 मिनट के अंदर इन्हें यहाँ से नहीं ले गई तो वो खुद आ जाएंगे इन्हें लेने ।
उसका दिमाग खराब हो गया है क्या ? इसीलिए मैं चाहता था ये लड़का इंडिया में न आए । एक तो इस लड़की ने गलती की ऊपर से…
सर मुझे इन्हें लेकर जाना होगा अभी ।
उनसे बोलो कि हम दोनों बात कर रहें हैं। उसे यहाँ आने की कोई जरूरत नहीं है। अच्छे से जानता है कि अगर यहाँ आया तो किसी न किसी को उसपर शक हो जाएगा और फिर क्या होगा, उसे ये भी पता है।
सर का फोन आ रहा है। मधुर ने स्क्रीन बंसल साहब की तरफ की ।
अन्विका आज जो हुआ है दोबारा नहीं होना चाहिए समझ गई । ड्राइवर की बेटी हो मालिक बनने की कोशिश मत करो । अब ले जाओ इस लड़की को ।
अन्विका सारे रास्ते कार के कोने में बैठी सुबकती रही। उसके मुँह से एक भी शब्द नहीं निकला । जब वो फ्लैट पर पहुंची तो उसने मधुर को रोक लिया ।
तुम कौन हो ?
मैं मधुर हूँ, सर की मैनेजर ।
एक सलाह देना चाहती हूँ तुम्हे , दे सकती हूँ?
हाँ क्यों नहीं मैम।
भागो जितनी तेज भाग सकती हो भागो यहाँ से वरना ये दोनों बाप बेटे मिलकर तुम्हें भी कड़वाहट से भर देंगे और तुम अपने नाम के उल्टा हो जाओगी । इनका काम ही है भोले भाले लोगों की जिंदगी में जहर भरने का । ये सब कहते कहते उसका गला फिर रूंध आया था ।
मैम आप सर को गलत समझ रहीं हैं…!
जाओ अब यहाँ से। अन्विका रोते रोते फ्लैट के अंदर चली गई ।
रोज थोड़ी देर फर्श पर हाथ पैर पटकने के बाद उसे नींद आ जाती थी लेकिन आज आधे घंटे से वो पूरे कमरे में रेंग रही है और नींद का कहीं अता पता नहीं है। फ्लैट में उसके लिए काम करने वाली काकी ने उसे संभालने की कोशिश की लेकिन वो भी अन्विका को शांत नहीं कर पाई।

कोई नहीं है उसका यहाँ ! इस ठंडी फर्श के अलावा कोई दूसरा है ही नहीं जो उसे कसके सीने से लगा सके । माँ बचपन में गुजर गईं और पापा जवान होते ही । एक छोटा भाई है जिसने उससे मुँह ही मोड़ लिया है। कोई अपना उसके लिए क्यों नहीं रुका ?
यहाँ क्यों छोड़ गएं सब उसे नौकर बनाकर । एक बार बस एक बार मयंक की ट्रेनिंग पूरी हो जाए वो सबको इन लोगों की असलियत बता देगी।
अन्विका फर्श पर ही बिलखते बिलखते सो गई ।
सुबह जब उसकी आँख खुली तो वो बिस्तर पर थी । उसने अपनी आँखें मिचमिचाई और आसपास देखा , ये उसका कमरा नहीं है । वो तुरंत बिस्तर से नीचे उतर गई।
जैसे ही वो बरामदे को पार करके हॉल में पहुंची उसे एक आवाज सुनाई पड़ी ।
Good morning ! काफी देर कर दी उठने में ?
मैं यहाँ कैसे आई ?
तुम वहाँ न अपने सोने का ध्यान रखती हो और न खाने का इसीलिए अब से तुम यही रहोगी।
तुम लोगों ने मुझे अपना गुलाम समझ के रखा है क्या ? जब मन आया प्यार से बुलाकर बात कर ली , जब मन आया दुत्कार के भगा दिया । जब मन आया बोला ये करो जब मन आया तो वो करो ….!
I’m Sorry ! पापा ने जो भी कल कहा उसके लिए मैं सच में बहुत शर्मिंदा….
उन्होंने कहा या तुमने कहलवाया ? इतना ही मर्द थे तो कल ऑफिस में ही भिड़ लेते अपने पापा को सब क्यों बताया ? ऐसा तो बच्चे करते हैं जब किसी से जीत नहीं पाते तो अपने माँ- बाप को बीच में ले आते हैं।
देखो मैंने उन्हें कुछ भी नहीं बताया था। मुझे तो ये भी नहीं पता कि उन तक ऑफिस की बात पहुंची कैसे ? तुम्हारे घर जाने की बात सुनते ही समझ गया था कि किसी ने पापा को कुछ बताया है, इसीलिए तुरंत मैं भी घर के लिए निकल पड़ा था । वो उसे समझाते हुए उसके करीब पहुँच गया था , लेकिन अन्विका ने तुरंत अपने कदम पीछे खींच लिए ।
अगर तुमने मेरे करीब आने की कोशिश की या मुझे यहाँ जबरदस्ती रखना चाहा तो याद रखना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा ।
अन्वी देखो मैं…..
अन्विका नाम है मेरा समझे , पूरा नाम लिया करो मेरा।
अगर पूरा नाम लेने की बात है तो मुझे अन्विका विक्रांत बंसल बुलाना पड़ेगा ।
अन्विका वर्मा बस सिर्फ इतना । ये पति होने का ढोंग तुम दुनिया के लिए बचाकर रखो । वो विक्रांत को साइड करते हुए वहाँ से निकल गई ।
ऑफिस पहुँचते ही अन्विका को झटका लगा । इस हफ्ते कंपनी में इन्वेस्ट हुए शेयर्स की रिपोर्ट टेबल पर पड़ी थी। इस महीने के सबसे निचले स्तर पर सुपीरियर टेक के शेयर्स आ गएं थे। ये खबर विक्रांत तक भी पहुंची थी और प्रकाश बंसल तक भी ।
प्रकाश बंसल ने तुरंत अन्विका को कॉल लगाया और कंपनी को हाइलाइट करने के बारे में पूछा ।
सर मैं कैसे बताऊं मुझे तो कुछ आइडिया भी नहीं है इन बातों का ।
थोड़ी देर तक बात करने के बाद अन्विका को सैलून जाने के लिए निकलना पड़ा ।
दोपहर में जब वो आई तो उसे कुछ सवालों की लिस्ट पकड़ा दी गई, उनके जवाब भी नीचे लिखे हुए थे। सारे सवालों को अच्छे से तैयार करने के बाद उसे कॉन्फिडेंस आया ।
जिन रिपोर्टर को अन्विका के इंटरव्यू के लिए आना था वो किसी और काम में फंस गईं इस वजह से उनकी जगह दूसरी रिपोर्टर आई । अन्विका के लिए इंटरव्यू स्क्रिप्टेड की जगह अनएक्सेप्टेड हो गया था ।
थोड़ी देर सामान्य बातचीत के बाद अन्विका का इंटरव्यू शुरू हुआ । विक्रांत को कमरे में ही मौजूद रहने को कहा गया था ताकि कहीं से भी बात बिगड़े तो वो सम्भाल सके। इसीलिए वो दरवाजे के पास बॉडीगार्ड की तरह खड़ा था ।

आप कहती हैं कि आपने Love marriage की है लेकिन आपको जानने वाले बताते है कि ये शादी आपकी मर्जी के खिलाफ हुई है। आपके भाई का कहना है कि सालों से आप प्रकाश जी के बेटे से मिली भी नहीं हैं ?
लोगों को गलतफहमी इसलिए होती है क्योंकि हमने हमेशा से ही अपने रिश्ते को सबसे छुपा कर रखा है। बचपन से ही हम दोनों बहुत गुपचुप रहने वाले इंसान थे। इसीलिए जब रिलेशनशिप में आएं तब भी सब छुपा के ही रखा। यहाँ तक कि हमारी शादी में भी मुश्किल से 10 लोग शामिल हुए थे।
आपने कहा कि बचपन से ही आप दोनों साथ हैं ?
जी हाँ! जैसा कि सभी जानते हैं मेरे पापा प्रकाश अंकल के ड्राइवर थे । लेकिन उन्होंने हमेशा मेरे पापा को अपना दोस्त और बड़ा भाई ही माना । इसलिए हम दोनों भाई बहन भी उनके बच्चे के जैसे ही हैं। बचपन से ही उनके घर आना जाना था हम लोगों का । सुबह-सुबह पापा ही हम तीनों को स्कूल छोड़ने जाते थे। इस दौरान कार में मेरी और विकी की नोंकझोंक चलती रहती थी।
विकी की माँ ने हम तीनों के लिए बहुत बार टिफिन बनाकर भी भेजे हैं और कई बार हमें घर पर बुलाकर हमारी पसंद का खाना भी खिलाया हैं। बचपन में ही हम इतने करीब थे कि आप सोच भी नहीं सकती उसके अमेरिका जाने के बाद दो दिन मेरी हालत क्या हुई थी ! मुझे इतना ज्यादा बुखार हो आया था कि डॉक्टर भी परेशान हो गएं थे। आंटी जी तरह तरह से मुझे बहलाने की कोशिश करती थी उन दिनों।
ऐसा लगता है कि मिसेज बंसल बचपन से ही आपको पसंद करती थीं ?
बहुत ज्यादा ! उन्होंने हमेशा मुझे अपनी बेटी की तरह माना । विकी के यूएस चले जाने के बाद तो मुझसे और भी ज्यादा प्यार करने लगी थीं। अपनी माँ के गुजरने के बाद भी मुझे तब तक माँ की कमी महसूस नहीं हुई जब तक आंटी भी मुझे छोड़कर नहीं चली गई ।
भगवान उनकी आत्मा को शांति दे! वो सच में बहुत प्यारी थीं। ..… तो माना जा सकता है आप दोनों को करीब लाने का काम उन्होंने ही किया ?
हाँ कह सकते हैं। मैं हाईस्कूल में थी जब वो हमें छोड़कर चली गई ।
विकी आएं थें उस समय इंडिया । एक तो हम दोनों ही इमोशनली बहुत कमजोर थे और पुरानी दोस्ती का साथ पाकर और करीब आ गएं। तब से हम लोग अक्सर फोन पर बातें करने लगे और एक दूसरे का सहारा बन गएं। मेरे पापा की डेथ में जब उन्होंने मुझे संभाला तब हम लोगों का रिश्ता और गहरा हो गया ।
बात करते-करते अन्विका का गला भर आया । कोने में खड़े विक्रांत की आँखों में भी आँसू आ गएं। वो आज भी इस गिल्ट के साथ जीता है कि अन्विका के पापा की मौत की खबर उसे टाइम पर क्यों नहीं दी गई ? उसने अपने पापा से जब इस बात पर शिकायत की थी तो वो भड़क गएं थें –
“हर दो-चार महीने में कोई न कोई नौकर मर जाता है तो क्या अब मैं सबकी मौतें ही तुम्हें बताऊं ?”
जब अन्विका को उसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी तब वो उसके पास था ही नहीं ।
रिपोर्टर ने अन्विका को पानी देकर शांत कराया । उसके बाद आगे के सवाल पूछे।
आपकी शादी के लिए प्रकाश बंसल जी कैसे माने ?
जैसा कि मैंने बताया उन्होंने हमेशा मुझे बेटी की तरह माना है। मेरे पापा के जाने के बाद उन्होंने मुझसे कहा थी कि आज से वही मेरे पापा है । तब से ही मेरा उनके साथ बॉन्ड बन गया था। विकी ने उन्हें मेरे बारे में बताया तो उन्होंने खुशी खुशी हाँ कर दी क्योंकि उनके लिए अमीरी- गरीबी कोई मायने नहीं रखती बस इंसान का चरित्र ठीक होना चाहिए ।
विकी अमेरिका में रहते हैं और आप इंडिया में तो ये long distance relationship आप को परेशान नहीं करती हैं?
करती तो है लेकिन कुछ कर भी तो नहीं सकते है। अमेरिका का कारोबार उन्हे देखना पड़ता है और इंडिया में मैं संभालती हूँ। जब भी एक दूसरे से बात करने का मन होता है तो वीडियो कॉल कर लेते हैं। कभी-कभार मैं उनसे मिलने भी चली जाती हूँ।
वो इंडिया नहीं आतें?
नहीं ! मुझसे शादी करने के बाद भले ही आना शुरू कर दें लेकिन पहले नहीं आते थे।
ऐसी अफवाह है कि चौधरी ग्रुप्स ने उन्हें मारने की फिरौती दे रखी है?
देखिए इस पर मैं क्या ही कहूं ! जब तक सारा सच सामने न हो तब तक किसी का नाम लेना ठीक नहीं होगा ।
मतलब इस बात से आप इनकार नहीं करती कि आपके पति को जान का खतरा हैं?
हाँ उन्हें धमकी दी जाती रहती है……
अन्विका का जवाब पूरा होने से पहले ही प्रकाश जी कमरे में आ गएं। विक्रांत भी थोड़ा हैरान हुआ कि बीच इंटरव्यू में कैसे आ सकते हैं ! अन्विका भी परेशान हो गई। रिपोर्टर भी अपनी कुर्सी से खड़ी हो गई।
अरे आप बैठ कर इंटरव्यू जारी रखिए मैं तो बस अपनी SEO बिटिया के पास आया था । उसे रोता देखा तो रहा नहीं गया मुझसे ।
तुम ठीक हो न बेटा ? उन्होंने उसके सर पर हाथ रख कर पूछा ।
हाँ पापा जी ।
तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है तुम बेझिझक हर उस इंसान का नाम ले सकती हो जिस पर तुम्हें शक है चाहे वो चौधरी साहब ही क्यों न हो । इस बात को पहले से ही सभी जानते है तुम भी कह सकती हो कोई बड़ी बात नहीं होगी । तुम्हें अब तक जो पता चला है और उन लोगों को सबक सिखाने के लिए तुम जो करने वाली हो वो सब बोल सकती हो। इतना कहने के बाद वो रिपोर्टर की तरफ मुड़ गएं- चलिए आप आगे के सवाल पूछिए ।
तो आप ये मानती हैं कि चौधरी जी ही विकी को मरवाना चाहते हैं?
अन्विका ने प्रकाश तरफ देखा उनकी आँखों में दिख रहे गुस्से को देख कर ही वो समझ गई कि आगे क्या बोलना है।
हाँ मुझे ऐसा लगता है। उन्होंने पहले भी कई बार उन पर हमले की कोशिश की है..! उन्हें लगता है कि मैं डर कर चुप बैठ जाऊंगी लेकिन मैं उन लोगों का पर्दाफाश करवा के ही दम लूंगी….!
सर आप बाहर जाएंगे ? इंटरव्यू खत्म होने के बाद मैम खुद आपसे मिलने आ जाएंगी । अन्विका के चेहरे के उड़े हुए रंग को देख कर विक्रांत ने अपने पापा को कमरे से बाहर निकालना ठीक समझा इसीलिए दरवाजा खोल कर उन्हें बाहर जाने को बोल दिया ।
इंटरव्यू खत्म होने के बाद अन्विका को सीधे प्रकाश जी के केबिन में जाना पड़ा ।
तुमने ये कहा कैसे कि तुम्हें मालूम नहीं है धमकी देने वाले कौन है? जिस बात को लगातार मीडिया तक पहुंचने की जरूरत है ताकि वो लोग कुछ करने की हिम्मत न जुटा सके , तुम उसी बात को नकार दे रही थी।
मैं थोड़ी सी घबराई हुई थी रिपोर्टर वो सवाल नहीं पूछ रही थी जो मैंने तैयार किए थे ।
तुम्हारे पास अपना दिमाग नहीं है क्या ? स्कूल जाने वाली बच्ची हो जो सारे सवाल रटाए जाएंगे ? इतनी बड़ी हो गई हो लेकिन सिचुएशन देख कर काम करना नहीं आया तुमको ….
पापा बस बहुत हो गया है अब और नहीं ….! विक्रांत को जैसे ही पता चला कि अन्विका को बुलाया गया है वो भी तुरंत केबिन में आ गया ।
क्या और नहीं ! अगर तुम थोड़ा सख्ती से पेश आते इसके साथ तो मुझे जरूरत ही क्या थी इससे उलझने की?
मैं कैसे पेश आना चाहता हूँ ये आप नहीं सिखाएंगे मुझे और न आप ही अन्विका से इस तरह बात करेंगे । विक्रांत उसे किनारे करके खुद प्रकाश के सामने खड़ा हो गया।
मुझे मेरे कर्मचारी से कैसे बात करनी है और कैसे नहीं ये तुम नहीं बताओगे ।
ये आपकी कर्मचारी नहीं मेरी पत्नी है।
तुम भी पागल हो रहे हो क्या इस लड़की की संगत में ? अरे बेटा कहाँ ये ड्राइवर की लड़की और कहाँ तुम प्रकाश बंसल के बेटे ! तुम तो उस सफेद कागज को ही सीरियस ले बैठे । तुमने सोच भी कैसे लिया कि अपने एकलौते लड़के की शादी मैं ऐसी लड़की से कराऊंगा । जरा ये मामला शांत हो जाएं फिर मैंने एक लड़की पसंद कर ली है तुम्हारे लिए ।
आपके लिए वो सफेद कागज होंगे लेकिन मेरे लिए मैरिज सर्टिफिकेट थे इसीलिए अब आपको मेरे लिए कोई और लड़की पसंद करने की जरूरत नहीं है पापा ।
विकी अपनी बकवास बंद करो कहीं तुम्हारी बातों से मेरा सर घूम गया तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा । एक तो मामूली लड़की के लिए अपने बाप के सामने खड़े हो ऊपर से जुबान भी चला रहे हो।
अन्विका मामूली नहीं है समझे आप ! विक्रांत की आवाज आप ही आप तेज हो गई ।
तुम्हारी इतनी हिम्मत मुझपर चिल्लाओगे ? उन्होंने विक्रांत का कॉलर कस के पकड़ लिया ।
अन्विका के सामने नन्हें विक्रांत की शकल घूम गई । जो अपने पापा से थप्पड़ खाने के बाद माँ की तरफ भागता था । लेकिन आज तो माँ भी नहीं है…..
सर …सर … सॉरी.. ये मेरी गलती है ..! मैं आगे से ध्यान रखूंगी। अन्विका विक्रांत के आगे आकर खड़ी हो गई।
आप दोनों आपस में मत लड़िए। आप जो चाहते हैं वही होगा ।
चलो यहाँ से । विक्रांत ने अपने पापा का हाथ झटक कर अन्विका का हाथ पकड़ लिया । उसने खींच कर छुड़ाने की कोशिश की लेकिन नहीं छुड़ा पाई । दोनों केबिन के बाहर आएं तो सभी को अपनी तरफ देखता पाकर उसने अन्विका का हाथ छोड़ दिया ।
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