Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 4

Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 4

Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple  कहानी के भाग 3 में आपने पढ़ा कि अन्विका को बंसल हाउस बुलाया जाता है और प्रकाश बंसल उसे बहुत फटकारते हैं। तब तक मधुर आ जाती है और उसे अपने साथ ले जाती है। अन्विका रोते रोते अपने कमरे के फर्श पर दो जाती है लेकिन सुबह जब आँख खुलती है तो खुद को विक्रांत के घर में पाती है। विक्रांत अपने पिता के बर्ताव के लिए माफी मांगता है लेकिन अन्विका उससे झगड़ा करके वहाँ से चली जाती है। ऑफिस में पहुंच कर उसे एक इंटरव्यू देने के लिए ऑर्डर मिलता है।

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इंटरव्यू के बीच में ही आकर प्रकाश बंसल उसे चौधरी के खिलाफ बोलने के लिए उकसाते हैं। इंटरव्यू खत्म होने के बाद जब वो बंसल साहब के पास जाती है तो वो फिर उस पर चिल्लाने लगते हैं। लेकिन तब विक्रांत उन दोनों के बीच आकर खड़ा हो जाता है और बोलता है कि उसकी पत्नी से कोई इस तरह बात नहीं कर सकता है। इसके बाद दोनों बाप बेटों में बहस बढ़ जाती है, अन्विका बात दबाने के लिए माफी मांग लेती है और विक्रांत के साथ केबिन के बाहर आ जाती है। अब आगे –

अगर विक्रांत मेरे फ्लैट के अंदर आएं तो सोच लेना आप लोगों की शिकायत बड़े सर से कर दूंगी । अपनी कार के पीछे विक्रांत की कार को आता हुआ देख लिया था अन्विका ने , इसीलिए फ्लैट पर पहुंचते ही गार्ड्स को सख्त हिदायत दे दी थी कि कल की तरह विक्रांत फ्लैट में न आ पाए ।

फ्रेश होने के बाद जब ताजी हवा खाने अन्विका बालकनी में आई तो देखा विक्रांत कार के बोनेट पर बैठा उसके फ्लैट की तरह ही देख रहा है। गॉर्ड उसको घेर कर खड़े है। भले ही रात हो चुकी है लेकिन आसपास इतनी रोशनी है कि विक्रांत किसी का भी निशाना बन सकता है।

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हे भगवान अगर इसको कुछ हो गया तो मुझे भी जिंदा नहीं रहने देंगे ये लोग..!  अन्विका जल्दी से दौड़ती हुई नीचे आई आई दरवाजा खोल दिया ।

पता नहीं ये चौधरी तुम्हें कब मरेगा लेकिन तुम्हारी ऐसी ही हरकतें रहीं तो मैं तुम्हें जल्दी ही मार दूंगी। अन्विका गुस्से से भरी हुई सोफे की तकिया इधर उधर फेंक कर बैठ गई । विक्रांत शांति से कुर्सी पर बैठ गया ।

तुम मार सकती हो क्योंकि तुम्हारा हक है मुझपर लेकिन किसी और की औकात नहीं है इतनी ।
अपनी ये चिकनी चुपड़ी बातें अपने पास रखो मुझपर इनका असर नहीं होगा समझे । जल्दी से बताओ यहाँ किस लिए आए हो और तुरंत निकल लो यहाँ से।

मैं पूछने आया था कि तुम्हें मैं घटिया क्यों लगता हूँ?
तुम अब भी वहीं अटके हो ?
अरे बताओ न ।
तुम्हें सच में नहीं पता हैं मुझे तुमसे इतनी चिढ़ क्यों होती है? क्यों तुम मुझे इतने खराब लगते हो?
अगर पता होता तो रातों को जागकर ये सब क्यों सोचता रहता !

कितने भोले दिखने की कोशिश करते हो तुम!  कोई मान नहीं सकता कि इतने शरीफ चेहरे वाला इंसान लड़की को डरा धमका कर जबरदस्ती शादी भी कर सकता है, उसकी पढ़ाई छुड़ा सकता है और उसे अपने परिवार से दूर कर सकता है ।

मैंने ऐसा कब किया ? मतलब अपनी बात साबित करने के लिए कुछ भी इल्जाम लगा दो । मैं जब रजिस्ट्रार ऑफिस पहुँचा था उससे पहले ही तुम लाल जोड़ा पहने वहाँ मौजूद थी । मुझे तो ऐसा लगा था कि मुझसे ज्यादा तुम उतावली हो गई हो मुझसे शादी करने के लिए । विक्रांत कुर्सी छोड़ कर उसकी तरफ आ गया था।

और वो जोड़ा पहनाया किसने था ? अन्विका भी तन कर खड़ी हो गई थी उसके सामने । इसके बाद दोनों में बहसबाजी होने लगी ।
मैं तो नहीं आया था पहनने बाकी चाहे कोई भी हो ।

तुम और तुम्हारे पापा कुछ अलग तो हो नहीं । उन्होंने क्या मुझे बुलाने से पहले तुमसे एक बार भी न पूछा होगा। ऐसा तो है नहीं कि तुम्हें पता न चला हो कि ये सब मेरी मर्जी के खिलाफ हो रहा है और तुमने अनजाने में मुझसे शादी दी हो ।
ऐसा ही है । मुझे पता होता कि ये सब तुमसे जबरदस्ती करवाया जा रहा है तो मैं साइन ही नहीं करता उन कागजों पर । ज्यादा से ज्यादा क्या होता थोड़ा और ज्यादा फटकार दिया जाता बस लेकिन जिंदगी भर के तुम्हारे तानों से तो आजाद हो जाता ।

झूठ मत बोलो तुम्हें सब पता था ।

मुझे सुबह कहा गया था कि आज मेरी शादी है। मैंने तुरंत साफ न कर दिया था । पापा ने फोटो दिखाई और बोला मुझे तुमसे शादी करनी पड़ेगी । उन्होंने मुझे तभी बताया था कि ये एक टैम्परेरी शादी है दुनिया को दिखाने के लिए। लेकिन जब तुम्हारा चेहरा देखा तो पूरा बचपन आँखों के सामने नाच गया । मेरे लिए यकीन करना मुश्किल था कि जिसे कभी पाने का सपना देखना भी मुझे नसीब नहीं होता था वो मेरी पत्नी बनने वाली है। जब मुझे मेरा पहला प्यार थाली में परोस कर दिया जा रहा था तो मैं भी बेवकूफों की तरफ मुंह मोड़ कर बैठने वाला नहीं था फिर ।

ये पहले प्यार से क्या मतलब है तुम्हारा? मैं बचपन में तुम्हारी दोस्त थी और कुछ नहीं । लगता है दोपहर वाले इंटरव्यू को तुमने सीरियस ले लिया है । अन्विका अपने पैर सिकोड़ कर वापस सोफे पर बैठ गई थी।
इंटरव्यू से याद आया क्या तुम्हें सच में मेरे जाने के बाद बुखार आया था ? विक्रांत बगल वाले सोफे पर बैठकर उसके चेहरे की तरफ ताकने लगा ।
मयंक को भी आया था ।

तुम सिर्फ अभी अपनी बताओ ।

कहा तो आ गया था थोड़ा बहुत । आयेगा भी क्यों नहीं मेरा मैथ्स का होमवर्क तो तुम करते थे, तुम्हारे जाने के बाद मेरी मदद कौन करेगा यही सोच- सोच कर आ गया होगा बुखार । एक तो तुम मुझसे एक क्लॉस सीनियर भी थे और बड़े घर से भी इसीलिए कोई बुली नहीं करता था मुझे । तुम्हारे जाने के बाद सब मुझे परेशान करना शुरू न कर दे इसकी और टेंशन हो गई थी।

सच में बस यही बात थी ? उसका उत्साह ठंडा पड़ गया।
क्लॉस 5 में पढ़ने वाली लड़की से आप इससे ज्यादा क्या डिजर्व करते हैं महोदय ?

तुम्हें इतने सालों में मेरी याद नहीं आई एक बार भी ?
थोड़ा बहुत आती थी लेकिन मयंक की जिम्मेदारी और पापा की देखभाल में उलझने के बाद आनी कम हो गई । जब पापा गएं उस दिन बहुत याद आई । लेकिन बाद की कसम ले लो मुझसे इन 7 सालों में जो एक बार भी तुम्हारी याद आई हो । अन्विका ने आँखें बंद करके सोफे पर सिर टिका दिया।

जानता हूँ मुझे उस वक्त तुम्हारे साथ होना चाहिए था लेकिन मुझे इस बारे में कोई खबर ही नहीं दी गई । महीने भर बाद एक दोस्त से पता चला था तब इतनी ज्यादा शर्मिंदगी महसूस हुई कि आने कि हिम्मत ही न जुटा सका । मम्मी के फ्यूनरल में भी एक बार तुमसे बात करना चाहता था लेकिन मेरी सिक्योरिटी इतनी टाइट थी कि मुझे ही साँस लेने में दिक्कत होने लगी थी । तब भी दो दिनों के भीतर मुझे वापस भेज दिया गया था । मम्मी का शोक खत्म होने का भी इंतजार नहीं किया था पापा ने। विक्रांत की आँखें भर आई । उसने रुमाल निकाल कर आँखों पर रख लिया ।

किस बाप को शौक होता है अपनी औलाद को दूर करने का ! वो खुद बेबस थे, खुद को सम्भाल नहीं पा रहें थे तुमको कहाँ से संभालते । जिस फिक्र में आंटी जी चल बसी उसी फिक्र को सीने में दबाए वो आज भी जी रहें हैं। उन्हें भी सपने आते होंगे कि कोई गोली उनके बेटे के सीने को चीर कर निकल गई है और वो चौक के बैठ जाते होंगे ।

वो डिजर्व करते हैं रातों को जागना लेकिन उनके साथ बाकी सब को सजा क्यों मिली ? मेरी जिंदगी क्यों कैद कर दी गई ? कभी- कभी तो ये सब सोचा है मैंने कि खुद ही किसी बिल्डिंग से छलांग लगा कर इस जीवन से मुक्ति पा जाऊं।

तुम भी न कुछ भी सोच लेते हो पागल कही के । …मैं कॉफी मंगवा रही हूँ तुम्हारे लिए …!
व्हिस्की हैं? उसने रुमाल वापस जेब में डाल लिया ।
तुम शराब पीने लगे हो ? अन्विका चौंक गई।

शराब और व्हिस्की थोड़े अलग-अलग होते हैं।
दोनों का काम ही लीवर को सड़ाना होता है समझे ।
तो तुम नहीं पीती इनमें से कुछ ?

इतने महंगे शौक पालने के पैसे नहीं रहें हैं मेरे पास ।
इसमें क्या महंगा और क्या सस्ता नशा तो चढ़ ही जाएगा।
बात शराब की नहीं उसके बाद ऑर्गन फैलियर का जो रिस्क होगा उसके इलाज के लिए पैसे होने चाहिए ।

काफी दूसदर्शी सोच है तुम्हारी ।
और नहीं तो क्या ! चलो तुम बैठो मैं कॉफी लेकर आती हूँ या फिर चाय पीने का मन हो तो ….
अभी सिर्फ तुमसे बात करने का मन है , तुम यहीं बैठी रहो ।

क्या बात करनी है बोलो । अन्विका अपनी गोद में तकिया रख कर आराम से बैठ गई।
मयंक क्या कर रहा है आजकल ?
मसूरी में हैं IAS की ट्रेनिंग ….

सच में वो IAS बन गया है ! मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि टिंकू सा लड़का एक अधिकारी बनकर आएगा मेरे सामने । उसने मुझे इस बारे में बताया ही नहीं, उसकी छोड़ो दो महीने से तुम साथ हो लेकिन तुमने भी कुछ नहीं बताया ।

मुझे लगा कि तुम्हें पता होगा ।
यार तुम्हें हर बात लगती ही है?
Sorry ! मैं सच में नहीं समझ पाई थी कि इन सब में तुम शामिल नहीं हो । आज अगर तुमसे बात न होती तो मैं जिंदगी भर इन सब का जिम्मेदार तुम्हें ही मानती ।

तभी कहते हैं कि कभी-कभी बात करना भी जरूरी होता है अपनों से । खैर … हम मयंक की बात कर रहें थें ! तुम्हें तो पार्टी देना चाहिए अब मुझे ।
हाँ ले लेना ।
मेरी तो उससे बात नहीं होती वरना उसी से पार्टी लेता जाकर । पता नहीं क्या सिस्टम है कि उनका नंबर कभी लगता ही नहीं ।
Block करके रखा होगा तुम्हें ।

मुझे ? अरे तुम भूल गई बचपन में कैसे मेरी गोद में आकर चढ़ जाता था । तुमसे ज्यादा मैं उसे लंच में खिलाने के लिए लेकर गया हूँ और बात करती हो कि मुझे ब्लॉक कर दिया । हो सकता है उसे पता ही न हो कि मेरा नंबर है तभी कॉल रिसीव नहीं करता । विक्रांत ने अन्विका की बात सिरे से खारिज कर दी लेकिन उसका दिल जानता था कि ये सच है।

विक्रांत जब तक आंटी थी तभी तक सब अच्छा था । उनके जाने के बाद बंसल सर जैसे मेरे पापा को ट्रीट करते थे, जब ये देखकर मुझे तुमसे नफरत हो गई वो तो फिर भी इतना करीब नहीं था तुम्हारे सोचो उसे कितनी चिढ़ होगी तुमसे !
Sorry Yaar ! विक्रांत का सर झुक गया ।

मैडम डिनर तैयार है आप दोनों आ जाइए। काकी दरवाजे से कहकर ही लौट गई ।
विक्रांत …चलो !
नहीं! तुम जाओ । मुझसे नहीं खाया जाएगा ।
क्यों ? ऐसा भी क्या बन गया है जो नहीं खाया जाएगा।

मेरा पीने का मन है और मैं आज रात वही करूंगा । ये खाना वाना तुम जैसी संस्कारी लड़कियों के लिए ही ठीक है। विक्रांत कुर्सी से उठ खड़ा हुआ ।
ज्यादा मत पीना टाइम से ऑफिस भी पहुंचना है समझ गए !
Yes ma’am ! विक्रांत ने सर झुकाते हुए कहा।

अन्विका का इंटरव्यू सामने आते ही चौधरी ग्रुप ऑफ कंपनीज ने कोर्ट में मानहानि का केस फाइल कर दिया। उन्होंने 150 करोड़ का मुआवजा या फिर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की शर्त रखी ।
प्रकाश बंसल ने मीडिया में बयान जारी करके कहा – “अन्विका अभी नादान है सुनी सुनाई बातों में आ जाती है। लेकिन चौधरी साहब बड़े हैं और अपने बड़प्पन का फर्ज निभाते हुए उसे माफ कर देना चाहिए ।”

अगले दिन टीवी पर लाइव आकर अन्विका ने भी माफी मांगी।
“मेरी मंशा कोई भी बेबुनियाद इल्जाम लगाकर चौधरी जी को बदनाम करने की नहीं थी। मेरे पास गलत जानकारी थी जिसका मैंने वेरिफिकेशन भी नहीं किया । मेरी वजह से उनकी छवि को जो नुकसान पहुँचा है उसके लिए मैं माफी मांगती हूँ।”

इस कॉरपोरेट ड्रामे में सुपीरियर टेक के शेयर्स काफी उछल गएं थें । अन्विका और विकी की लव स्टोरी से ज्यादा ट्रेंड इस कंट्रोवर्सी का हो गया था।
अपना स्टेटमेंट देने के बाद अन्विका केबिन में बहुत देर तक रोती रही। वो खुद अपनी नजरों में गिरती जा रही थी तो अपने जान पहचान वालों के सामने क्या खाक इज्जतदार बची होगी ।

विक्रांत जानता था कि अन्विका आज फिर फर्श पर ही सोने वाली है। इसीलिए रात 12 बजे के आसपास वो उसे अपने घर लाने के लिए निकल गया था।

अन्विका आज फिर खुद को उस के बिस्तर पर पाकर गुस्सा हो गई । विक्रांत कमरे में ही बैठा उसके जागने का ही इंतजार कर रहा था।
ये क्या तमाशा लगा रखा है तुम दोनों बाप-बेटों ने मिलकर ? कोई इंसान अब अपनी मर्जी से सो भी नहीं सकता है क्या ? मेरी साँसें भी क्या अब तुम लोगों की मर्जी से चलेंगी ….!
शांत हो जाओ …! विक्रांत प्यार से उसे समझाते हुए बोला।

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भाड़ में गए तुम और भाड़ में गई तुम्हारी शांति । मुझे बस मेरे फ्लैट पर जाना है। वो विक्रांत पर चीखते हुए आगे बढ़ी तो उसने पीछे से हाथ पकड़ लिया ।
पहले मेरी बात सुनो …!
मुझे कुछ नहीं सुनना , कुछ भी नहीं ! उसने अपना हाथ छुड़ा लिया ।
सुनना पड़ेगा । विक्रांत ने आगे बढ़कर अन्विका को अपनी तरफ खींच लिया ।

ये क्या बद्तमीजी है विक्रांत ! छोड़ो मुझे ।
शांति से बैठ कर मेरी बात सुनोगी तो ही छोडूंगा।
अच्छा ठीक है सुनूंगी ।
विक्रांत ने उसे अपनी पकड़ से आजाद कर दिया ।

बको ।
तुम्हारी जान को खतरा है ।
अरे ! कह दो कि तुम्हें ये भी पहले से पता नहीं था ? जिस दिन शादी वाले डॉक्यूमेंट मीडिया में रिलीज हुए थे मेरी जान को तो उसी दिन से खतरा हो गया था।
तब चौधरी से था अब मेरे पापा से हैं…!
उसकी बात सुनते ही अन्विका सकते में आ गई । थोड़ी देर तो उसके मुंह से कुछ बोला भी नहीं गया ।

विक्रांत मुझे पता है कि वो मुझे पसंद नहीं करते लेकिन वो मुझसे नफरत भी नहीं करते हैं। तुम्हारे पापा कोई बुरे इंसान नहीं हैं यार बस थोड़ा सख्त है।
हाँ जानता हूँ। वो ये सब जानबूझ कर नहीं बल्कि मजबूर होकर कर रहे हैं। मैंने सब कुछ एनालाइज करने के बाद पाया है कि पापा चौधरी का पूरा फोकस तुम्हारी तरफ लाना चाहते हैं। उन्हें अच्छे से पता है चौधरी अपनी कसम नहीं तोड़ेगा इसीलिए वो तुम्हें शिकार बना रहें हैं। शायद मेरे पापा चाहते हैं कि वो लोग तुम्हें कुछ करें जिसके बाद पुलिस चौधरी को जेल में डाल दे । पापा को लोगों की सहानुभूति भी मिल जाएगी और मुझे छुप कर रहने से आजादी भी ।

तुम किस कसम की बात कर रहे हो? क्या सिर्फ इसीलिए तुम्हारी जान के पीछे पड़े हैं लोग ? ये पैसा , दौलत , बिजनेस इनमें से कोई वजह नहीं है क्या ?
तुम्हें बाद में बताऊंगा कभी । अभी बहुत ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है तुम्हें । फिलहाल के लिए तुम मेरे साथ रहने वाली हो तो उस पर फोकस करो ।
नहीं विक्रांत मैं यहाँ नहीं रह सकती हूँ।
देखो यहाँ तुम महफूज रहोगी और मुझे भी तुम्हारी फिक्र नहीं करनी पड़ेगी ।

तुम्हें मेरी फिक्र करने को कहता ही कौन है !
मेरा दिल ! विक्रांत उसके करीब आ गया ।

कहीं ऐसा न हो मुझे बचाने के चक्कर में तुम भी यहीं दफना दिए जाओ फिर प्रकाश सर को हमारी लाशें ही मिले , इसीलिए बेहतर होगा हम दूर ही रहें । अन्विका ने उसके सीने पर हाथ रख के उसे दूर कर दिया ।
हमारी नहीं , मेरी सिर्फ मेरी लाश मिलेगी उन्हें अगर कभी मिली भी तो क्योंकि मैं तुम्हें कभी कुछ होने ही नहीं दूंगा। विक्रांत ने उसका हाथ हटाकर उसे अपने सीने के पास खींच लिया ।

हमें ऑफिस के लिए लेट हो रहा है। अन्विका ने सारी बातें खत्म करते हुए कहा ताकि जल्दी से वो विक्रांत से दूर जा सके ।
Ok Mam ! आज से आप मेरे साथ ही ऑफिस चलेंगी जाइए तैयारी कीजिए चलने की । विक्रांत ने उसे छोड़ते हुए कहा ।
सिर्फ सपने देखो मेरे साथ रहने और आने- जाने के ! उससे दूर जाते ही अन्विका ने फिर से उसकी बात मानने से इनकार कर दिया ।

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