Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 5

Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 5

Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 4 कहानी के 4 भाग में आपने पढ़ा कि विक्रांत और अन्विका के बीच बहस हो जाती है। जब दोनों खुल कर बात करते हैं तब पता चलता है कि उन दोनों की शादी के लिए विक्रांत ने कोई जोर नहीं दिया था और अभी तक जो भी उसके साथ हुआ है उसमें भी विक्रांत का हाथ नहीं था । लेकिन विक्रांत की बातों पर अन्विका पूरी तरह आश्वस्त नहीं हो पाती है।

इसीलिए जब प्रकाश बंसल के कहने पर उसे चौधरी साहब से माफी मांगनी पड़ती है तो उसका गुस्सा फिर भड़क जाता है। जब ये सब विक्रांत को पता चलता है तो रात में उसके घर जाकर वो फिर से अन्विका को अपने घर पर उठा लाता है। सुबह फिर से खुद को विक्रांत के घर में पाकर वो विक्रांत से झगड़ने लगती है। खुद को हारता देख कर अन्विका चुपचाप उसकी बात मानने का दिखावा करती है और ऑफिस का बहाना बनाकर वहाँ से निकल जाती हैं। अब आगे –

 

ऑफिस से निकलने से पहले ही प्रकाश सर की कॉल आ गई । जब अन्विका ने उनसे बात की तो उसका मूड खराब हो गया ।
उसे ऑर्डर मिला था विक्रांत के घर शिफ्ट होने का ।

अन्विका तेजी से इधर उधर पटकते हुए अपना सामान कमरे में जमा रही थी । विक्रांत दबे पाँव आकर दरवाजे पर खड़ा हो गया ।
तुम्हें इतने बड़े महल में रखा जा रहा है फिर भी इतनी गुस्सा । तुम्हारी जगह कोई और होता तो अहसान मानता मेरा ।
चले जाओ यहाँ से वरना तुम्हारा मुंह तोड़ दूंगी । अन्विका ने एक किताब उस पर फेंकी।

विक्रांत ने तुरंत उस को कैच कर लिया । किताब से एक फोटो विक्रांत के पैरों के पास आकर गिरी ।
ये कौन है ? मयंक तो नहीं लगता ! विक्रांत ने जैसे ही वो फोटो उठाई अन्विका ने लपक कर उससे छीन ली ।

तुमसे मतलब ? ऐसे मेरी पर्सनल चीजों को हाथ मत लगाया करो ।
मैंने कहाँ लगाया था तुम्हीं ने किताब मेरी तरफ फेंकी थी।

अच्छा ठीक है जो भी हो तुम जाओ अभी यहाँ से । मुझे बहुत सारा काम करना है अभी ।
मैं कुछ मदद करूं ? वैसे भी रात हो रही है कहाँ कर पाओगी अकेले !

तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूं इससे बड़े बड़े काम भी मैंने अकेले ही किए हैं।
किए होंगे लेकिन तब मैं नहीं था न ! अब हूँ तो मुझे तुम्हारी मदद करने दो ।

अगर तुम्हें सच में कुछ करना है तो बस इतना बता दो कि तुमने प्रकाश सर से क्या कहा था जो उन्होंने मुझे यहाँ भेजा ।

ऐसा कुछ खास तो नहीं बस इतना बोला था कि मुझे डर है तुम अपना गुस्सा और बदला पूरा करने के लिए हमारी कंपनी के सीक्रेट्स लीक कर सकती हो , इसीलिए तुम पर निगरानी की सख्त जरूरत है ।

सच में तुम इतने घटिया हो या सिर्फ मेरे मामले में ही तुम्हें ये खुराफात सूझती है? वो उसके सामने आकर खड़ी हो गई ।
ये सही है तुम्हारा ! एक तो मैं तुम्हारी फिक्र करूं ऊपर से बातें भी सुनूं!

तो ऐसे काम ही क्यों करो जो बाते सुननी पड़े । अन्विका ने उसे कमरे से बाहर धक्का दे कर दरवाजा बंद कर लिया ।

जब से विक्रांत ने अन्विका के साथ में आना जाना शुरू किया है तब से ऑफिस का गॉसिप मार्केट गर्म हो गया है। कोई न कोई उन दोनों पर अपनी पैनी निगाह बनाएं ही रखता है ।

“होगा तो यही आखिर जवान खून है दोनों ऊपर से मैडम का पति बैठा है परदेश में । अब कौन ही रोकेगा इन दोनों को ? ”
“मुझे तो लगता है दोनों साथ में मिलकर कंपनी साफ करने के इरादे से हैं ।”
“बचपन से साथ है ऐसे में हो ही नहीं सकता कि कुछ न हो।”

ये सारी बातें ऑफिस के अंदर बहुत ही गुपचुप तरीके से होती थीं ताकि इनकी भनक अन्विका या विक्रांत तक न पहुंच सके ।

अन्विका दिन रात काम में ही डूबती जा रही थी। विक्रांत उससे दो घड़ी प्यार से बात करने बैठता तो भी उसे मार्केट प्राइज , डील्स , शेयर मार्केट , क्लाइंट्स , एक्सचेंज ,  …. इन्हीं सब चीजों के बारे में बात करनी होती थी। विक्रांत उसे इन सब से थोड़ा दूर ले जाना चाहता था । इसीलिए उसने एक तरकीब लगाई ।

संडे के दिन जब दोनों ही घर पर रुके थे तो वो उससे बात करने गया ।
दो हफ्ते पहले तुमने पार्टी देने के लिए कहा था लेकिन अभी तक दी ही नहीं है।

पार्टी? किस बात की ? मुझे नहीं याद आ रहा ! अन्विका ने लैपटॉप से बिना सर उठाए हुए ही जवाब दिया ।
अरे यार…बंद करो इसे ! छुट्टी के दिन भी तुम्हें काम ही करना है। विक्रांत ने लैपटॉप को बंद करके साइड में कर दिया ।

तुमने मयंक के सिलेक्शन की पार्टी देने को कहा था मैं उसी की बात कर रहा हूँ ।

अरे हाँ! मैं तो भूल ही गई थी , चलो ले लेना किसी दिन। उसने दोबारा लैपटॉप खोलने की कोशिश की तो विक्रांत ने लैपटॉप पर हाथ रख दिया ।
किसी दिन नहीं आज ही चाहिए मुझे ।

पक्का आज ही ?
हाँ।

Ok! मैं जल्दी से तैयार हो कर आती हूँ।
Take your time मैं इंतजार कर लूंगा ।

अन्विका विक्रांत को एक शांत और सस्ते रेस्टोरेंट में लेकर गई । रेस्टोरेंट छोटा था मगर वहाँ का एस्थेटिक कमाल का लगा विक्रांत का ।
Nice place !

तुम्हें पसंद आया ? पता है ये हम लोगों का अड्डा हुआ करता था।
हम लोगों का ?

मेरा मतलब मेरे साथ पढ़ने वाले दोस्त , हॉस्टल वाले । हम 5- 7 दोस्त थे शनिवार को आते थे क्योंकि उस दिन डिस्काउंट मिलता है यहाँ।
अब क्यों नहीं मिलती अपने दोस्तों से ? विक्रांत उसके चेहरे को गहराई से देख रहा था और अन्विका मेन्यू लिस्ट को।
अब …? वो एक लंबी सांस लेकर खामोश हो गई।

कैसी हो…? अचानक से किसी ने पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखा और वो बर्फ की तरह जम गई । अन्विका से पीछे पलट कर देखा तक नहीं गया ।
Excuse me ! हाथ हटाइए । विक्रांत जैसे ही कुर्सी से खड़ा हुआ अन्विका ने तुरंत उसे चुप करा दिया।

विक्रांत ! सर हैं मेरे ।

अब तक दानियाल भी अन्विका के सामने आकर खड़ा हो गया था । अन्विका ने उसकी तरफ देखा और उसने अन्विका के चेहरे की तरफ ।
विक्रांत ने ध्यान से देखा ये वही लड़का था जिसकी फोटो उस दिन किताब से गिरी थी ।

मैम रात होने लगी है ! चलिए निकलते हैं यहाँ से। विक्रांत ने अपना कोट सही करते हुए अन्विका से बोला ।
हाँ अभी निकलते हैं थोड़ी देर में पहले तुम इनसे मिलो

ये हैं केयर हॉस्पिटल के डायरेक्टर के बेटे और मेरे सीनियर दानियाल सर और आप हैं मेरे पर्सनल असिस्टेंट विक्रांत ।
अन्विका के इंट्रो कराने के बाद दोनों ने एक दूसरे से हाथ मिलाया । विक्रांत को उसके लिए एक एस्ट्रा चेयर भी मंगानी पड़ी ।

जब से कॉलेज से निकली हो तब से एक बार भी मुझे फोन तक नहीं किया लगता है बहुत ज्यादा बिजी हो गई हो अपने काम में !

नहीं सर ऐसा कुछ नहीं है। दरअसल एकदम अलग फील्ड है तो चीजें सीखने में टाइम लग रहा है। फिर आप भी तो बिजी रहते हैं इतना ज्यादा ।
बिजी तो पहले भी रहता था लेकिन तुम्हारे नंबर से आई कॉल्स तो हमेशा ही रिसीव की है ।

जी… ? मतलब आपने मेरा नंबर पहले से ही सेव रखा था? अन्विका ने थोड़ा हैरान होकर पूछा ।
मैंने कभी तुम्हारा नंबर नहीं सेव किया बस एक बार तुम्हारी दोस्त के फोन में देखा था तबसे याद हो गया ।
आपकी मेमोरी भी हमेशा से शार्प रही है।

आप दोनों कुछ लेंगे या सिर्फ बातें ही करते रहेंगे ? विक्रांत ने एरिटेड होते हुए बोला ।
यहाँ पे क्या खाना पीना तुम दोनों मेरे घर चलो वहीं बढ़िया से डिनर करा कर भेजूंगा ।

इस बात पर अन्विका ने विक्रांत की तरफ देखा , उसकी घूरती आँखों को देख कर ही समझ गई कि ये आइडिया उसे पसंद नहीं आया है।
नहीं सर आज नहीं फिर कभी टाइम मिलेगा तो जरूर आयेंगे दोनों लोग ।

लगता है तुम्हारे हसबैंड ने काफी रिस्ट्रिक्शन लगा रखी है तुम पर ?

नहीं सर ऐसी कोई बात नहीं है वो तो मुझे किसी बात पर नहीं टोकते लेकिन मुझे भी तो थोड़ा बहुत उनका खयाल करना पड़ेगा ।
करना तो पड़ेगा क्योंकि जरा सी चूक पर इंडिया से लेकर अमेरिका तक मीडिया तुम्हें मसाले की तरह पेश कर देगी।

लेकिन अपने किसी परिचित के घर जाना मुझे कहीं से भी नहीं लगता कि सनसनीखेज खबर बन सकता है। अगर तुम चलती तो तुम्हारी फेवरेट भिंडी की सब्जी , चपाती , प्याज का आचार और मिर्च की चटनी मैं अपने हाथों से बनाता।

ओह माय गॉड! मेरे मुंह में तो सुनकर ही पानी आ गया।  आपको पता है मुझे ये इतना पसंद था कि कई बार मैंने आपका टिफिन चुरा कर खाया है ।
मैं तुम्हारे लिए ही लाता था …!

क्या..! अन्विका एकदम से असमंजस की स्थिति में आ गई । उसके लिए ही लाते थे? क्यों लाते थे? क्या सर भी मुझे पसंद…! विक्रांत है पास में …. ! उसने विक्रांत के चेहरे की तरफ देखा जो गुस्से और जलन से लाल हो रहा था ।

सर मुझे लगता है कि अब मुझे चलना चाहिए थोड़ी देर में एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करनी है।

मतलब इतने दिन बाद मिली हो और मुझसे बात करने का भी समय नहीं है ?
सर इंपोर्टेड न होता तो रुक जाती ।

चलो ठीक है जाओ । मुझे तुम्हारे एग्जाम्स से जुड़ी कुछ बात करनी थी तो अगर टाइम मिले तो कॉल कर लेना ।
Exams? सर दरअसल मैं ….

Please don’t say it ! मुझे भी पता है और तुम्हें भी पता है कि डॉक्टर बनने का सपना तुम्हारे लिए जिंदगी से भी बढ़कर था । क्लासेज छोड़ दी कोई बात नहीं मैं देख लूंगा लेकिन exams तो नहीं छोड़ने चाहिए तुम्हें ।

सर नहीं दे पाऊंगी । एक साथ दो चीजें संभालना मेरे लिए काफी मुश्किल हो रहा है।
तो बिजनेस छोड़ दो , ये पोस्ट छोड़ दो …!

आप होश में तो हैं मिस्टर ! ये सब बकवास करने के लिए रोक रहें थे हमें ? विक्रांत का गुस्सा भड़क गया।

पहली बात तो तुम जिस लड़की के असिस्टेंट हो उसका सबसे करीबी दोस्त हूँ मैं और दूसरी बात एक ऐसी पोस्ट के लिए जो उससे कभी भी छीनी जा सकती है उसके लिए अपने पिता जी का सपना छोड़ना निहायत ही बेवकूफी है । एक सीनियर और दोस्त होने के नाते मैं उसे सलाह दे सकता हूँ कि उसे क्या करना चाहिए । दूसरे का नौकर बनकर जीने से अच्छा होता है आदमी अपना मालिक बनकर जिए ।

सर प्लीज आप दोनों बहस मत करिए । मैं समझती हूँ आपकी बात को और इस पर सोचूंगी भी ।

सोचूंगी या अपने पति से पूछूंगी ? देखो अन्विका तुमने उस टाइम भी डॉक्टर बनने का सपना नहीं छोड़ा था जब तुम्हें फीस इकट्ठी करने के लिए दूसरों के प्रोजेक्ट बनाने पड़ते थे , नाइट शिफ्ट में नर्सिंग करनी पड़ती थी ,  बेबीसिटिंग तक भी की है यार तुमने इतना सब करने के बाद भी जब हार नहीं मानी तो अब क्यों पीछे हट रही हो ?

अब तो तुम्हारे पास इतना सारा पैसा है कि फीस के साथ तुम एस्ट्रा चार्ज भी भर दो तो तुम्हें पता न चले । ये सब इसलिए क्योंकि तुम्हारे पति और ससुर इसके खिलाफ है ?

मैं जा रही हूँ…! अन्विका भागते हुए रेस्टोरेंट से निकल गई।
अन्विका… ! दानियाल ने उसे पीछे से रोका।
मैम ! …..विक्रांत अन्विका का फोन और पर्स उठा कर उसके पीछे गया ।

अन्विका पिछली सीट पर बैठी सिसकती रही । विक्रांत ने भी उसे चुप कराने की कोशिश नहीं की बस शीशे में बार बार उसे देखता रहा।
मैं अपना MBBS complete करूंगी चाहे कुछ भी हो जाए । जैसे ही वो खुद को थोड़ा सम्भाल पाई विक्रांत से उलझ गई।

तो तुम करो तुम्हें रोक कौन रहा है?
तुम रोकोगे तब भी नहीं रुकूंगी समझे ।
अच्छी बात है।

तुम्हारे लिए तो अच्छी बात होगी ही ! कहीं मेरे पेपर छूट जाए तो उससे भी अच्छी बात हो जाएगी तुम्हारे लिए।
हम बाद में बात करें अभी तुम शांत नहीं हो ? कहते हुए विक्रांत ने ड्राइवर को स्पीड बढ़ाने का इशारा किया और खुद खिड़की खोलकर बाहर देखने लगा।

देर रात को वो रोते रोते फर्श पर ही सोई लेकिन जब सुबह उठी तो अपने मुलायम रेशमी बिस्तर पर थी।
वो नहाने के बाद नीचे ब्रेकफास्ट करने आई विक्रांत टेबल पर बैठा हुआ उसी का इंतजार कर रहा था।

love story

गुस्सा कुछ कम हुआ ?

मुझे पेपर्स नहीं देने । उसने सपाट लहजे में कहा और खाना शुरू कर दिया ।
क्यों क्या हो गया ? कल तो तैयार हुई थी?

तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम लोगों का ही कहा कर रही हूँ फिर सवाल जवाब क्यों कर रहें हो!
अच्छा मैंने कब कह दिया तुमसे की अपनी डिग्री छोड़ दो?

तुमने नहीं कहा लेकिन तुम्हारे पापा…

पापा…पापा…पापा ! मैं तुमसे कितनी बार कहूं कि मुझसे सिर्फ वही बातें कहो जो मेरे मुंह से निकली हो । मैं सिर्फ अपनी बातों का जिम्मेदार हूँ उनकी नहीं। जहाँ तक मेरा सवाल है मैने तुमसे ऐसा कभी नहीं कहा और न कहूंगा।

सच में तुम नहीं कहोगे ? अन्विका को जैसे अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ ।

मैं तुम्हारे जीवन के किसी भी निजी फैसले , रिश्ते , पढ़ाई या नौकरी किसी भी चीज में तब तक नहीं रोकूंगा जब तक वो तुम्हारे लिए गलत न हो ।
लेकिन प्रकाश सर ? उन्होंने मुझसे डिग्री छोड़ने को कहा था अगर उन्हें पता चल गया तो मेरे साथ तुम्हें भी खूब सुनाएंगे ।

मैं उनसे इतना नहीं डरता जितना तुम्हारा कोई ख्वाब अधूरा रह जाने से डरता हूँ। इसीलिए तुम सिर्फ अपनी पढ़ाई पर फोकस करो पापा को मैं कुछ भी पता नहीं चलने दूंगा ।

लेकिन पढ़ूं कैसे ? मैंने सिर्फ कुछ लेक्चर्स ही अटेंड किए थे । सिर्फ एक महीने की सेल्फ स्टडी से पेपर नहीं पास होंगे मुझे गाइडेंस चाहिए ।
हाँ तो किसी क्लासमेट से हेल्प ले लो ।

कोई नहीं मदद करेगा सब डरते है मुझसे ।
कोई दोस्त या  प्रोफेसर ?

नहीं ! किसी प्रोफेसर के पास जाने का मतलब है प्रकाश सर तक बात पहुंचना ।
Ok तुम परेशान न हो मैं कुछ करता हूँ ।

नाश्ता खत्म करने के बाद दोनों ऑफिस के लिए निकल गएं।

ऑफिस में काम करने से ज्यादा विक्रांत का ध्यान अन्विका की पढ़ाई की तरफ था । उधर से ध्यान हटाने की कोशिश करता तो कल शाम की बातें याद आ जाती । कल रात को भी बहुत देर तक वो जगता रहा जब थोड़ी सी नींद भी आई तो दानियाल और अन्विका उसे एकसाथ हँसते हुए दिखाई दिए ।

वो अपनी माँ के फ्यूनरल से होकर जब अमेरिका लौट गया था तबसे उसके दिल में बहुत अंदर तक अन्विका बस गई थी । बचपन के रिश्ते को उसने सिर्फ दोस्ती समझ के सम्भाल लिया था लेकिन जवानी के पहले चरण में उसे देखना बिल्कुल नया और अलग था ।

उसने खुद को जब भी किसी लड़की के करीब ले जाने की कोशिश की तो उसे अन्विका की याद आई । लेकिन इधर अन्विका ने तो उसे जरा भी याद नहीं किया , यहाँ तक कि उसे किसी और से प्यार भी हो चुका है ! क्या एक बार भी उसे दानियाल के चेहरे में मेरा चेहरा नहीं दिखा होगा ?

“सर आज आपको केयर हॉस्पिटल चलना है। ” मधुर ने वॉइस मैसेज भेजकर विक्रांत को रिमाइंड कराया।

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