Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 6
Secret SEO: Love Story of a Corporate Power कहानी के भाग 5 में आपने पढ़ा कि अन्विका विक्रांत के घर में शिफ्ट हो जाती है। दोनों का रिश्ता फिर से दोस्ताना हो जाता है। अन्विका मयंक के सिलेक्शन की पार्टी भी देने के लिए तैयार हो जाती है। संडे के दिन विक्रांत और अन्विका दोनों एक रेस्टोरेंट में जाते हैं, जो कभी अन्विका का फेवरेट हुआ करता था। वहीं उन दोनों को अन्विका के सीनियर डॉक्टर दानियाल मिलते हैं। डॉक्टर की फोटो विक्रांत ने अन्विका की किताब में देखी हुई होती है इसीलिए उसे डॉक्टर से बहुत जलन हो रही होती है।
बातों ही बातों में दानियाल अन्विका को उसके MBBS Finals के एग्जाम देने को बोलता है। जब वो मना करती है तो दानियाल उसे समझाने लगता है और बिजनेस छोड़ने को कहता है जिस पर विक्रांत भड़क जाता है और दोनों में बहस हो जाती है। उसी रात अन्विका विक्रांत को अपनी पढ़ाई कंप्लीट करने का फैसला सुना देती है। लेकिन सुबह होते ही प्रकाश अंकल के डर से मना कर देती है।
विक्रांत उनको संभालने की जिम्मेदारी खुद पर ले लेता है। लेकिन अन्विका की एक और समस्या थी कि पढ़ाई में पीछे होने के बाद उसे हेल्प चाहिए और कोई उसकी मदद करने को तैयार नहीं होगा।
तब न चाहते हुए भी विक्रांत को दानियाल के बारे में सोचना पड़ा । अब आगे –
- Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 5
- Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 4
- Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 3
- Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 2
- Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 1
विक्रांत ने आज तक कभी ऐसा काम नहीं किया था जो करने का उसका मन न हो । एक बार जो बात उसने मना कर दी वो काम फिर उसके पापा भी नहीं करवा पाएं हैं भले ही उसे फटकार सुननी पड़े लेकिन वो अपनी मर्जी के खिलाफ का कभी नहीं गया । लेकिन आज सिर्फ अन्विका की खुशी के लिए , उसके सपने के लिए उसने अपने दिल के खिलाफ जाकर निर्णय लिया ।
तुम इस वक्त यहाँ? दानियाल अपने रूम में विक्रांत को देख कर चौंक गया।
आपके हॉस्पिटल गया था वहाँ से पता चला कि आप कॉलेज के हॉस्टल में रहते हैं तो यहाँ चला आया ।
आओ बैठो चाय मंगवाता हूँ।
नहीं । मैं सिर्फ मैम के एग्जाम के बारे में बात करने आया हूँ।
तुम क्यों आएं ? तुम्हारी मैम को इजाजत नहीं है क्या किसी से मिलने जाने की ?
जैसा कि आप जानते हैं कि वो एक मल्टीनेशनल कंपनी की SEO हैं तो उनके पास इतना टाइम नहीं होता कि किसी से मिलने जा पाएँ। उनसे मिलने आने वालों को भी एप्वाइंटमेंट लेनी पड़ती हैं। उनकी व्यस्तता को देखते हुए मैंने सोचा कि मैं ही आपसे मिल लूं। आपकी तरह मुझे भी लगता है कि उन्हें ये डिग्री कंप्लीट करनी चाहिए । इसीलिए मैं आपसे सिर्फ ये जानने आया था कि क्या आप किसी ऐसे इंसान से मुझे मिलवा सकते हैं जो मैम की प्राइवेसी का ध्यान रखते हुए उन्हें महीने भर गाइडेंस दे सके । विक्रांत ने उसे ज्यादा बातचीत का मौका न देते हुए सिर्फ काम की ही बात की ।
दानियाल ने ज्यादा चेहरे पर आने तो नहीं दिया लेकिन उसकी पूरी आत्मा खुशी से झूम उठी थी । वो किसी बच्चे की तरह खुश होकर विक्रांत को गले लगाना चाहता था लेकिन उसे अपनी भावनाएं काबू में करनी पड़ी ।
वैसे उसे गाइड करने के लिए मिल तो जायेंगे कुछ लोग लेकिन उसकी प्राइवेसी सिर्फ मैं ही रख सकता हूँ , वैसे भी पिछले चार सालों से उसे मैं ही पढ़ाई में हेल्प करता आया हूँ।
ठीक है तो आप कल से आ जाना और आपकी जो भी फीस….!
उसकी जरूरत नहीं है। वो मेरी दोस्त है और उसकी हेल्प करना मेरा फर्ज ।
मुझे बड़ी बड़ी बातें सुनने की आदत नहीं है। मैम के एग्जाम्स खत्म होने के बाद आपको ब्लैंक चेक मिल जाएगा जितना भरना हो भर देना । अपनी बात खत्म करने बिना दानियाल का जवाब सुने वो कमरे से बाहर निकल आया ।
एटीट्यूट देखो लड़के का जैसे कंपनी इसी के बाप की हो! दानियाल पीछे से बड़बड़ा के रह गया ।
रात में दानियाल की कॉल आने पर अन्विका को जैसे ही पता चला कि विक्रांत उनके पास उसकी पढ़ाई की बात करने गया था तो वो तुरंत उसके कमरे में गई।वैसे तो वो कभी विक्रांत के कमरे में नहीं जाती लेकिन उसे वहाँ देखकर भी विक्रांत को कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि वो जानता था कि किसलिए आई है ।
कल तुम्हारे चेहरे को देख कर मैं समझ गई थी कि दानियाल तुम्हें पसंद नहीं आया और जब वो तुम्हें पसंद नहीं आया तो उसके पास क्यों गए थे तुम ।
अपना फर्ज निभाने ।
देखो मेरी नजरों में महान बनने की कोशिश मत करो ।
मैं महान नहीं बनना चाहता , एक पति हूँ और वही रहना चाहता हूँ।
No..! You are not my husband .
बस यही बताने आई थी या कुछ और भी बोलना है। विक्रांत अपने कपड़े उतारने लगा ।
ये…ये सब क्या कर रहें हो तुम ? अन्विका थोड़ा घबरा गई।
सोने जा रहा हूँ।
कपड़े उतार के ?
क्यों तुम पहन के सोती हो क्या ?
हाँ ठीक है… ठीक है … ! मैं सुबह बात करती हूँ तुमसे । अन्विका जाने को हुई तो विक्रांत ने उसका हाथ पकड़ लिया।
जो बात करनी है अभी करो।
मैं तो बस यही कहने आई थी कि तुमने जो भी किया होगा …सोच समझ के ही ..किया होगा । वो अपना हाथ खींचने की कोशिश करती रही तब तक विक्रांत ने अपनी शर्ट की सारी बटन खोल दी थी ।

अच्छा ! बस इतना ही कहना था ?
हाँ अब जाने दो ।
सच में जाना चाहती हो ?
हाँ…!
जाओ । विक्रांत ने उसकी कलाई छोड़ दी । जैसे ही हाथ छूटा वैसे ही अन्विका कमरे से भाग गई ।
“तुम सच में भागना चाहती हो मुझसे ! ” विक्रांत ने अपनी आँखें कस के बंद कर ली ।
आज से रोज शाम को ऑफिस से थोड़ा जल्दी निकल आना । मेरे स्टडी रूम में तुम्हारी किताबें रखवा दी हैं वहीं बैठ कर पढ़ाई करनी होगी । ब्रेकफास्ट करते हुए विक्रांत ने अन्विका से बातचीत चलाई ।
तुम अपना स्टडी रूम क्यों दे रहें हो मुझे …?
तुम्हारा स्टडी रूम तैयार होने में हफ्ते भर लग जाएंगे इसीलिए ।
नहीं मेरा मतलब कि मुझे इसकी जरूरत ही नहीं है मैं अपने कमरे में ही…
बेडरूम सोने के लिए होता है वहाँ तुम्हें पढ़ाई करने की कोई जरूरत नहीं है ।
अभी तक तो मैं वहीं पढ़ती थी तब क्यों नहीं कही मुझसे ये बात ?
क्योंकि तब तुम्हारे दानियाल सर नहीं पढ़ाने आने वाले थे , तुम अकेले पढ़ती थी ।
सच में तुम कितने घटिया आदमी हो यार ! अब तो मैं जरूर कमरे में ही पढूंगी ।
ठीक है फिर ये भी याद रखना अगर तुम्हारे बेडरूम में मेरे या तुम्हारे अलावा कोई बाहरी इंसान गया तो तुमको मेरे बेडरूम में मेरे साथ रहना पड़ेगा ।
तुमको क्या लगता है तुम जो कहोगे वही होगा ?
हाँ क्योंकि मैं कहता नहीं ऑर्डर देता हूँ और ये भी मेरा ऑर्डर है । विक्रांत ने अपनी प्लेट सरका दी ।
अब इससे ज्यादा बहस मत करना मुझसे तुम्हारा ही मूड खराब होगा । वो चेयर से उठ गया ।
शाम के पाँच बजने के बाद भी जब अन्विका अपने केबिन से नहीं निकली तो विक्रांत समझ गया कि वो भूल गई है।
मैम! ये फाइल्स मैं देख लूँगा आप फिलहाल मीटिंग के लिए जाएं । विक्रांत ने केबिन में आते ही घड़ी की तरफ इशारा किया । कमरे में वैभव और मिराज भी मौजूद थे इसीलिए उसने कुछ भी साफ तौर पर नहीं कहा था । उसे देख कर ही अन्विका को अपनी पढ़ाई का याद आया और वो तुरंत खड़ी हो गई ।
अन्विका के जाने के बाद विक्रांत भी ज्यादा देर ऑफिस में नहीं रुक पाया । सारे कर्मचारियों के निकलते ही वो भी ऑफिस से निकल गया ।
7 बजे के बाद जब दानियाल और अन्विका स्टडी रूम से बाहर निकले तो लिविंग रूम में विक्रांत बैठा दिखाई पड़ा।
तो तुम यहाँ इनके साथ ही रहते हो ? दानियाल उसके सामने खड़ा हो गया ।
आपको कोई तकलीफ है ? विक्रांत भी सोफे से उठ खड़ा हुआ ।
सर.. मैं कॉफी मंगवा रही हूँ आपके लिए । दोनों में बहसबाजी के डर से अन्विका बीच में बोल पड़ी।
हाँ तुम्हारा असिस्टेंट खड़ा तो हो ही गया है जाकर ले ही आए अब ।
हाँ विक्रां..त…! जैसे ही अन्विका ने कुछ बोलने की कोशिश की वैसे ही विक्रांत ने उसे घूर के देखा ।
रुको मैं मधुर को बोल कर आती हूँ…!
क्यों ये भाई साहब क्यों नहीं जा सकते हैं ? दानियाल ने विक्रांत के कंधे पर हाथ रख दिया ।
क्योंकि हर किसी का अपना काम और अपनी ड्यूटी होती है और हर इंसान को वही करना भी चाहिए । जो लोग दूसरे के काम में टांग अड़ाते हैं वो अपना काम करने के लायक भी नहीं बचते । विक्रांत ने उसका हाथ कंधे से हटाते हुए कहा ।
इतनी देर में उसका फोन बजने लगा ।
अन्वी…!
मिसेज अन्विका वर्मा …! विक्रांत ने दानियाल को घूरते हुए बोला ।
पापा की कॉल आ रही है तो कॉफी का प्लॉन कल के लिए रखते हैं। दानियाल ने अब तक फोन रिसीव करके चलना शुरू कर दिया था। उसके साथ अन्विका भी गेट तक छोड़ने गई थी।
स्टडी रूम का लॉक क्यों नहीं ठीक है? लिविंग रूम में आते ही वो विक्रांत पर भड़क गई।
पता नहीं अभी दो दिन पहले ही खराब हुआ था ।
दो दिन पहले खराब हुआ था और तुमने अभी तक बनवाया भी नहीं ?
जिन्हें बनाना था वो यहाँ है नहीं और मैं ऐसे किसी अनजान आदमी को तो घर का एक्सेस दे नहीं सकता हूँ। इसीलिए थोड़ा इंतजार कर लो अपना आदमी वापस आ जाए तो ठीक करवा दूँगा। विक्रांत ने अंगड़ाई लेते हुए कहा ।
जल्दी से जल्दी ठीक करवा देना वरना मुझे अपने कमरे में जाके पढ़ना पड़ेगा ।
सोचना भी मत क्योंकि ऐसा हुआ तो तुम्हारे दानियाल सर अगले दिन से मुझे सर कहना शुरू कर देंगे ।
तो तुम मुझसे कह रहे हो कि तुम उन्हें हमारे रिश्ते के बारे में बताओगे ?
अगर जरूरत पड़ी तो करना पड़ेगा ।
देखो तुम कभी भी उन्हें हमारे रिश्ते के बारे में नहीं बताओगे वरना मैं तुमसे बात नहीं करूंगी ।
मैं कभी भी उन्हें नहीं बताऊंगा कि मैं तुम्हारा पति हूँ लेकिन प्लीज उन्हें भी तमीज में रहना सिखा दो ।
मैं उनसे भी बात कर लूंगी ।
ये हुई न बात । चलो अब मूड अच्छा करो एक एक कप कॉफी पी लेते हैं । विक्रांत ने माहौल को हल्का करने के इरादे से कहा ।
ऑफिस में विक्रांत और अन्विका को लेकर चर्चाएं काफी तेज हो गईं हैं। उन दोनों को साथ देखते ही लोग आँखों ही आँखों में इशारे करके मुस्कुराने लगते हैं। जब से अन्विका ने लोगों की ये हरकत नोट की हैं तब से वो विक्रांत को केबिन में बुलाने से भी कतराने लगी है और ऑफिस भी अलग कार से अलग टाइम पर आती है।
तुमने मेरे साथ ऑफिस जाना क्यों छोड़ दिया है ? तीन दिन उसके बिना जाने पर विक्रांत के मन में बैठा डर खड़ा होने लगा कि कहीं वो उससे दूर जाने की कोशिश तो नहीं कर रही है।
मैं बच्ची नहीं हूँ जिसे कहीं आने जाने के लिए किसी दूसरे की जरूरत पड़े । कभी-कभी ठीक है तुम्हारे साथ चले जाना, लेकिन ये रोज-रोज नहीं हो सकता है । भले ही मैं डमी सीईओ हूँ लेकिन मुझे भी प्रोफेशनलिज्म मेंटेन करना पड़ेगा ।
आज तुम्हें प्रोफेशनलिज्म याद आ रहा है? महीने भर से ये नहीं दिखाई दे रहा था ।
ठीक है तुम चाहते हो न मैं वही करूं जो तुम चाहते हो ! चलो बोल दो कि मैं तुम्हारी नौकर हूँ और मेरी अपनी कोई मर्जी नहीं हैं मैं कल से ही तुम्हारे साथ जाने लगूंगी।
तुम्हें क्यों लगता है कि तुम किसी की नौकर हो ?
क्योंकि मेरे साथ बर्ताव ही ऐसा किया जाता है तो और क्या समझूं !
Fine तुम्हें जो अच्छा लगे वो करो मैं कुछ नहीं कहूँगा।
विक्रांत गुस्से में वहाँ से चला तो गया लेकिन उसका दिमाग वहीं पर अटक गया था। उसे लग रहा था कि दानियाल ने ही उसे कुछ भड़काया है ।
वैसे सच कहा जाएं तो दानियाल भड़काने की कोशिश तो करता है अन्विका को लेकिन सिर्फ उसके पति और ससुर के खिलाफ, विक्रांत का कहीं जिक्र ही नहीं आता है।
मुझे नहीं पता कि तुम्हें कौन सी स्क्रिप्ट दी जाती है पढ़ने के लिए तुम्हारे इंटरव्यूज में , लेकिन इतना जानता हूँ कि तुम एक्टिंग बहुत अच्छी करती हो। दानियाल ने नोट्स से ज्यादा अन्विका के चेहरे को पढ़ते हुए बोला था ।
आप मेरे इंटरव्यू देखते हैं ?
हाँ इंस्टेंट तो नहीं लेकिन एक दो दिन में देख लेता हूँ और जब भी देखता हूँ तुम्हारी मजबूरी पर तरस आता है।
नहीं सर मजबूरी की तो कोई बात नहीं है।
तो इंटरव्यू में जो बोलती हो सबकुछ सच होता है ?
दानियाल के इस सवाल पर अन्विका से कुछ नहीं बोला गया वो सर झुकाए बैठी रही ।
मैं जानता हूँ कि वो सच नहीं है इसीलिए मुझे तुम्हारे पति पर बहुत गुस्सा आती है। अच्छी- खासी शरारती लड़की को उन लोगों ने कठपुतली बना दिया है।
सर इसमें मेरे पति की कोई गलती नहीं है वो न पहले ही इन सब में शामिल थे और न अब शामिल है ।
तुम्हारा मतलब है कि उसे तुमसे कोई मतलब नहीं है ?
जी उन्हें मेरी फिक्र रहती है लेकिन वो मेरे काम में कोई दखल नहीं देते हैं।
तुम्हें गलतफहमी है कि वो तुम्हारी फिक्र करते हैं कुछ दिन में ये गलतफहमी भी दूर हो जाएगी । अभी तुम नादान हो इसीलिए तुम्हें सब अपनी तरह के ही भोले लगते हैं….!
मैम 7:15 हो चुका है अब आपको कॉफी के लिए आना चाहिए । मधुर ने दरवाजे से ही अन्विका को आवाज लगाई ।
7 बजे के बाद भी जब दोनों स्टडी रूम से बाहर नहीं निकले तो विक्रांत ने मधुर को उन्हें बुलाने भेज दिया।
दानियाल को यही बात सबसे खराब लगती है। 5 से 7 बजे के बीच उन्हें कोई डिस्टर्ब करने नहीं आता लेकिन 7 बजते ही कोई उन्हें वहाँ पर रहने भी नहीं देता है। कभी काकी , कभी मधुर तो कभी विक्रांत ही ऑफिस की कोई कॉल लेकर आ जाता है। 10 दिनों में ही दानियाल ने नोटिस कर लिया था कि अन्विका से बात करने पर सबसे ज्यादा दिक्कत विक्रांत को ही होती है। इसीलिए दानियाल एक दिन अन्विका को स्टडी रूम में ही छोड़ कर विक्रांत से बात करने चला आया।
तुम्हें पता है कॉलेज में लोग समझते थें कि अन्विका मेरी गर्लफ्रेंड है…!
ये कॉलेज नहीं उनका घर है और यहाँ कोई ऐसा नहीं समझता है।
समझे या न समझे लेकिन मैं बताना चाहता हूँ कि मैं आज भी उसका क्रश हूँ….
थे । अब वो शादीशुदा महिला हैं तो अब आप उनके गुरु और दोस्त के सिवा कुछ और नहीं हैं।
और तुम ? ये बात तो तुम पर भी लागू होती है न ! तुम्हें क्या लगता है जिन चोर आँखों से तुम उसे निहारते हो , वो मुझे दिखाई नहीं पड़ता है! देखो मैं अभी से चेतावनी दे रहा हूँ कि अपनी सोच बदल लो वरना बहुत भारी पड़ेगा तुम्हें । अपने पति से वो एक न एक दिन अलग होगी ही ये बात मैं जान गया हूँ तो तुम तो मुझसे पहले जानते होगे । लेकिन वो तुम्हारी कभी नहीं हो पाएगी ये भी याद रखना क्योंकि तुम दोनों के बीच मैं खड़ा हूँ। So Be Careful….!

Sir…! अन्विका रूम से बाहर निकल आई थी । उसे लगा ही था कि जरूर दोनों झगड़ रहे होंगे इसीलिए उसे ज्यादा देर शांत नहीं बैठा गया ।
हाँ आया । दानियाल तुरंत उठ कर चल दिया ।
विक्रांत वहीं के वहीं दानियाल को उसकी औकात दिखाना चाहता था लेकिन अन्विका के आते ही उसे अपना गुस्सा पीकर शांत रह जाना पड़ा ।
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