Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 1

Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 1

“अमेरिका से इंडिया वापस आने पर छोटे साहब को जान से मारने का प्लॉन है ।” सुपीरियर टेक कंपनी के मालिक प्रकाश बंसल को ये खबर उनके विरोधी दल में शामिल एक गुप्त कर्मचारी ने पहुंचाई थी।

“कब तक आखिर कब तक उसे विदेशों में छुपा कर रखना पड़ेगा ? अब तो इस लड़ाई का अंत होना ही चाहिए ।” यही सोच कर उन्होंने अपने DIG दोस्त को चौधरी ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक के खिलाफ धमकी का केस बनाकर गिरफ्तार करने को कहा । लेकिन बिना किसी सुबूत के एक ऐसा इल्ज़ाम जो अभी हुआ ही नहीं है , उसपर केस बन ही नहीं सकता है। जो बातचीत आपस में तय हुई है अगर उसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मिल जाती तो कुछ हो सकता था। अब उनकी मंशा जानने के लिए कोई चारा डालना पड़ेगा ।

” मशहूर इंडस्ट्रियलिस्ट प्रकाश बंसल के बेटे को जान का खतरा !” ये हेडिंग थी अखबारों की जो बस कुछ ही दिन चली ।
“सुपीरियर टेक की नई SEO प्रकाश बंसल की बहू अन्विका वर्मा बंसल होंगी ।” ये दूसरी खबर थी जो हफ्ते भर के अंदर अखबारों के छठे सातवें पेज पर दफन हो गई ।

शादी कब हुई , कैसे हुई इसका किसी को कोई ब्यौरा नहीं मालूम , लव मैरिज है अरेंज मैरिज ? कोई नहीं जानता । बस कुछ महिला अधिकारों के लिए सजग लोगों ने जरूर आवाज उठाई और शक जाहिर किया कि एमबीबीएस की स्टूडेंट अपना सपना छोड़ कर किसी ऐसी जगह पर क्यों बैठेगी जहाँ उसकी जान को भी खतरा हैं? फिर एक ड्राइवर की बेटी से बंसल जैसे उद्योगपति अपने बेटे की शादी क्यों करवाएंगे ?

अगर उनके बेटे को जान का खतरा है तो क्या गारंटी है कि उनकी बहू सुरक्षित रहेगी ? उसकी फिक्र नहीं है उनको क्या ? उसे क्यों कंपनी में भेज रहे हैं उसे तो अपने पति के पास अमेरिका में ही रहना चाहिए ।

मामला कुछ भी हो आवाज उठने से पहले ही सारी आवाजें बंद कर दी गईं। कुछ पैसों से , कुछ कानून की मदद से तो कुछ धमकी से । इस अचानक हुई शादी को बरसों से चले आ रहें प्रेम प्रसंग का परिणाम कहकर अन्य सभी बातों को मीडिया पटल से गायब कर दिया गया।

अन्विका जब ऑफिस में आई तो सब उसे एक “अधिकारी”की नजर से कम “बेचारी” की नजर से ज्यादा देख रहें थें। उसके साथ 10 बॉडीगार्ड्स भी थें। 2 बिल्डिंग के बाहर,  दो उसके केबिन के बाहर एक अंदर और बाकी के 5 बिल्डिंग के हर एक फ्लोर पर ।
विक्रांत को अन्विका  का पर्सनल असिस्टेंट बनाया गया ।

power couple

मेडिकल फील्ड से आने के कारण उसे बिजनेस की बारीकियों को समझने में बहुत दिक्कत महसूस हो रही थी।
वैसे तो विक्रांत भी उससे हफ्ते भर पहले ही आया था लेकिन इसी फील्ड में होने के कारण उसे इतनी बड़ी पोस्ट संभालने पर कोई दिक्कत नहीं आई । उसने अन्विका को धीरे धीरे बिजनेस टर्म्स समझने में मदद की ।

कंपनी के वरिष्ठ कर्मचारी दो नए चेहरों को को देख कर जलन का अनुभव कर रहें हैं। कुछ अधिकारी सोच रहें थे कि विक्रांत की जगह पर उन्हें पर्सनल असिस्टेंट क्यों नहीं बनाया गया ? कुछ ने बात खोद के निकाल ली कि दोनों स्कूल टाइम साथ पढ़े हैं इसीलिए SEO मैडम ने Favoritism किया है।

बात चाहे कुछ भी हो लेकिन विक्रांत और अन्विका इस कॉरपोरेट पॉलिटिक्स से दूर ही थें उनका पूरा फोकस अपने काम पर ही लगा हुआ था ।

मैम थिंक टैंक का मानना हैं कि हमें इसी हफ्ते अपना सॉफ्टवेयर लॉन्च करना चाहिए । विक्रांत ने एक रिपोर्ट  अन्विका की टेबल पर सबमिट की ।
तुम्हें क्या लगता है ?

मुझे लगता है कि कुछ दिन रुक जाना चाहिए क्योंकि मार्केट में अभी दो और कंपनीज ने अपने सॉफ्टवेयर लॉन्च किए हैं। इसी हफ्ते तक उनके फीडबैक मिल जाएंगे । उस आधार पर अगर हमें अपने सॉफ्टवेयर में कुछ बदलाव करना पड़ा तो सही समय पर हो जाएगा ।
Ok ! टीम को बोल दो कुछ दिन का इंतजार करें।अन्विका ने फाइल वापस लौटा दी।
Ok mam ! विक्रांत फाइल लेकर चला गया।

इस ताकतवर कुर्सी पर बैठ कर अन्विका  खुद को सबसे कमजोर पाती है। उसे जबरदस्ती एक ऐसे ढांचे में फिट कर दिया गया है जहाँ उसकी जरूरत ही नहीं थी। छोटी से छोटी सलाह के लिए भी उसे यहाँ दूसरों की , खासकर विक्रांत की सलाह पर निर्भर रहना था ।

कितनी अच्छी जगह पर थी वो पहले ! अपने लोग थे , दोस्त थे , सीनियर्स थे, दानियाल सर थें और हॉस्टल की मस्ती थी। कंकालों से बातें करना , ऑपरेशन में असिस्ट करने के बाद मेस में जाकर चाइनीज खाना , गले में स्टेथोस्कोप लटकाए जूनियर्स पर रोब डालना ..! सब कुछ एक ही कॉल में उससे दूर हो गया ।

पिछली जिंदगी याद आते ही अन्विका की आँखों में आँसू आ गएं । दरवाजे पर नॉक होते ही उसने तुरंत अपनी आँखें पोंछ डाली ।

मैम! हम जॉर्डन का प्रोग्राम खरीद रहें हैं या नहीं ? उनका मेल आया है मैं उन्हें क्या रिप्लाई दूँ ? संगीता केबिन में आई हुई थी।
ईमेल आया है तो रिप्लाई तो देना पड़ेगा ।
हाँ मैम ।
एक काम करो तुम जाओ मैं थोड़ी देर में तुम्हें बुलाकर email लिखवा दूंगी ।

उसके जाते ही अन्विका ने विक्रांत को कॉल लगाया ।
मैम आपने बुलाया ?
अन्दर आ जाओ ।
हाँ बताइए ।

हमें जॉर्डन का प्रोग्राम खरीदना हैं?
नहीं । अब से हम अपना प्रोग्राम डिजाइन कर रहें हैं तो हम उनका प्रोग्राम क्यों खरीदेंगे !
कंपनी का तो कोई नुकसान नहीं होगा इससे ?

नहीं बल्कि इससे फायदा ही होगा ।
Ok अब तुम जा सकते हो ।

मैम ? विक्रांत ने धीरे से उसे पुकारा ।
Yes ! उसने सर उठा कर देखा ।
Do you need something ?
No !

मुझे लग रहा है आप परेशान है।
वो तो मैं हमेशा ही रहने लगी हूँ उसमें तुम क्या कर लोगे?
जो भी आप चाहे मैं वो सब कर सकता हूँ। विक्रांत ने टेबल पर झुक कर कहा ताकि गार्ड को उनकी आवाज न सुनाई दे ।
कुछ भी कर सकते हो ? अन्विका भी टेबल पर उसकी तरफ झुकी ।

हाँ !
तो एक काम क्यों नहीं करते अपना ये मनहूस चेहरा लेकर यहाँ से दफा क्यों नहीं हो जाते ? वो गुस्से में बोलकर वापस पीछे हो गई ।
आप तो थोड़ी सी बात पर गुस्सा हो गईं फिलहाल तो अपनी तबियत पूछने वाले के साथ ऐसा नहीं किया जाता है।

तो अब तुम मुझे सिखाओगे कि कैसे क्या किया जाता है और कैसे क्या नहीं ?
Well ! देखा जाए तो अभी तक मैं ही यहाँ आपको हर चीज सीखा रहा हूँ । इस पर क्या कहना चाहेगी आप ? विक्रांत दोनों हाथों से टेबल के किनारे को पकड़ के खड़ा हो गया ।
उसकी ये बात सुनते ही अन्विका के चेहरे पर अनेकों भाव आए गएं हो गएं। उसका गुस्सा हवा हो गया और बेचारगी की झलक चेहरे पर उतर आई ।

सही कहा । कुछ आता ही होता तो यहाँ क्यों पड़ी होती ? अन्विका की आँखें भर आईं।
Hey hey… Sorry ! Please don’t cry . मेरा मतलब सिर्फ बिजनेस वर्ल्ड से था । बाकी दुनियादारी की समझ तुममें मुझसे भी कई गुना ज्यादा है ।
क्या यहाँ से जाओगे तुम ? प्लीज थोड़ी देर के लिए ।
Ok ! पर प्लीज रोना नहीं । विक्रांत बिना मुड़े उसके चेहरे को ही देखता हुआ बाहर निकल गया ।

अगले दिन जब अन्विका अपने केबिन में पहुंची तो टेबल पर लाल गुलाबों का एक बड़ा सा बुके रखा हुआ मिला । साथ में एक लेटर भी था । उसने खोलकर देखा तो उसपर विक्रांत ने एक लंबा सा माफीनामा लिखा था । लेकिन अन्विका ने बिना पढ़े ही लेटर वापस रख दिया और बुके गार्ड को देकर डस्टबिन में डालने को कह दिया।

डस्टबिन में फेंक दो जाकर ।
Are you sure mam ? गार्ड ने पूछा ।
सुना नहीं क्या ? इसे कूड़ेदान में फेंक कर आओ । इस बार वो गुस्से से बोली ।
Ok ! गार्ड ने उस बुके को कूड़े में फेंक दिया ।

संगीता दोपहर में एक फाइल लेकर आई थी उसके साथ विक्रांत भी था । दोनों की ही नजर दरवाजे के पास रखे डस्टबिन पर गई जिसमें बुके पड़ा हुआ था ।
मैम! कितने प्यारे फूल हैं आपने इन्हें फेंक क्यों दिया ? संगीता फूलों की देख के थोड़ा दुखी हुई ।
हमेशा फूलों को नहीं देने वाली नियत को भी देखना चाहिए ।

हाँ बात तो सही है। वैसे दिए किसने ?
दिए होंगे किसी घटिया आदमी ने ।
मतलब आपको पता नहीं है किसने दिए फिर भी आपने फेंक दिए…
तुम तो यहाँ रिपोर्ट सबमिट करने आई थी फिर फूलों पर चर्चा लेकर क्यों बैठ गईं। विक्रांत ने गुस्से में संगीता को फटकारा । गुस्सा तो आई अन्विका पर थी पर क्या करे बेचारा उस पर तो चिल्ला नहीं सकता था।

Sorry Sir ..! मैम मैंने कल जॉर्डन को ईमेल भेज दिया था उसकी फाइनल रिपोर्ट देख लीजिए । संगीता ने टेबल पर फाइल रखी और फूलों को ताकते हुए बाहर निकल गई । उसके जाने के बाद विक्रांत ने फाइल उठा ली और पढ़ने लगा ।
सब सही है साइन कर देना । उसने थोड़ा गुस्से से फाइल टेबल पर पटकी और केबिन से निकल गया ।

एक घंटे बाद विक्रांत के फोन पर अन्विका की दो कॉल्स आई लेकिन उसने एक भी रिसीव नहीं की । थोड़ी देर विचार करने के बाद वो आराम से अपने केबिन से निकल कर उसके केबिन तक गया । जैसे ही दरवाजे से अंदर झांका तो अन्विका के अलावा भी तीन लोग कुर्सी पर बैठे थे। उसे झांकते हुए देख कर अन्विका की सांस में साँस आई । इस वक्त उसे अन्विका  की कुर्सी के बगल में खड़ा होना चाहिए लेकिन वो केबिन के अंदर भी नहीं गया ।
विक्रांत मुस्कुराते हुए वापस अपने केबिन में आ गया ।

शाम के वक्त वो बहुत शालीन तरीके से अन्विका के केबिन में घुसा ।
मैम आपने मुझे कॉल किया था क्या ?
जब किया था तब क्यों नहीं आए ? वो गुस्से से उबल पड़ी ।
क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि आपको मेरा मनहूस घटिया चेहरा देखना पड़े ।
तो अब क्यों आएं हो ?

ताकि आपका गुस्से वाला , थका हुआ चेहरा देख सकूं ।
देखो विक्रांत मैं पहले ही बहुत परेशान हूँ मुझे और मत परेशान करो । चले जाओ यहाँ से अभी के अभी । वो सामने मौजूद डॉक्यूमेंट्स को इधर उधर रखने लगी।
Ok चला जाता हूँ। ये कहने के बाद भी जाने की बजाय विक्रांत उसकी टेबल के पास आकर खड़ा हो गया ।
क्यों आएं थें वो लोग ?

जब तुम्हें उनसे बात करनी चाहिए थी तब तो यहाँ पर थे नहीं फिर अभी क्यों पूछ रहें हो ?
Ok मत बताओ लेकिन अगर कुछ बता देती तो मैं हेल्प कर देता । विक्रांत जाने को मुड़ा तो अन्विका  ने बोलना शुरू कर दिया ।

किसी AI Project की बात कर रहें थे मुझे बस इतना ही समझ आया है । इस प्रोजेक्ट की एक एक डिटेल मुझे बंसल सर को देनी थी । अभी उनसे मिलने जाना है लेकिन अब उन्हें कैसे कन्विंस करना है ये मुझे समझ नहीं आ रहा है। अन्विका की आवाज बहुत थकी हुई लग रही थी ।

चलो एक डील करते हैं मैं इस प्रोजेक्ट की एक एक बात आपको समझा दूंगा बदले में आप मुझे बताएंगी कि आपने मुझे घटिया क्यों बोला था ? बोलिए मंजूर है ?
तुम्हारी ऐसी हरकतें ही तुम्हें घटिया बनाती हैं।
सिर्फ एक ही या और भी हैं ?
देखो तुम फिर से मेरा सर खा रहें हो ।

मैंने तो सिर्फ बात करने की कोशिश की है आपसे ।
मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी । अन्विका अपना सामान बैग में रखने लगने लगी ।

जब वो कार में बैठी तो मिराज दौड़ते हुए आई ।
मैम आपकी ये फाइल ! उसने अन्विका के हाथों में फाइल दे दी।
अब इसमें क्या है?

विक्रांत सर ने आपको देने को कहा था । इतना कह कर वो वापस चली गई ।
फाइल खोलकर देखा तो AI Project की ही फाइल थी। अन्विका को अपने सीने से एक बहुत बड़ा बोझ हटता हुआ महसूस हुआ । कार की विंडो पर किसी की परछाई देखकर उसने सर ऊपर उठाया तो देखा विक्रांत ऑफिस की बालकनी में खड़े होकर कॉफी पीते हुए उसे ही बॉय बोल था ।

ड्राइवर बंसल हाउस चलो । उसने कार का शीशा पूरा ऊपर चढ़ा लिया

                                                                                                                                                               Thanks for Reading 🙏

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