Love Beyond Beauty: An Acid Attack Survivor Love Story

Love Beyond Beauty: An Acid Attack Survivor Love Story

“ हे सिया … मेरी बात तो सुनो ” – सिया अपने काम से घर जा रही थी जब एक बार फिर राघव ने उसका रास्ता रोका था ।।
“ क्या दिक्कत है आपको .. क्यों मेरा पीछा कर रहे है” – सिया ने झुंझला के जवाब दिया था ।

राघव अक्सर ऐसे ही बीच सड़क पर उसका रास्ता रोकता था । कुछ दिन तो उसने उसे नजरअंदाज करने की कोशिश की पर अब तो वह जहां जाती वहां पहुंच जाता और आस पास के लोगों की बोलती नज़रे उसे साफ महसूस होती थी ।

एक जवान लड़की ऐसे किसी लड़के से मिलेगी तो लोग उसके बारे में क्या राय बनाएंगे वह जानती थी इसलिए उस से दूर रहती थी पर यह तो जिद्दी इंसान की तरह उसके पीछे ही पड़ गया था ।
“ देखिए मै आपको आख़िरी बार समझा रही हूँ कि मुझसे दूर रहिए वरना आप के लिए अच्छा नहीं होगा ”।
सिया ने उसे वॉर्न करने के लहजे में बोला पर सामने उस इंसान को कोई फर्क ही नहीं पड़ा ।

“ जो दिल के करीब होते है उनसे दूर नहीं रहा जाता और तुमने तो मेरा दिल में कब्जा जमा लिया अब बताओ कैसे दूर रहूं तुमसे ?” – राघव ने दिलफरेब मुस्कुराहट के साथ एक कदम आगे बढ़ाते हुए कहा ।
सिया ने गुस्से से उसे घूरा । वह बिना कुछ कहे ही उसके बगल से निकल गई ।

“ अच्छा कम से कम यह तो बता दो कि तुम इतनी हसीन हो कि हमेशा अपना चेहरा मास्क से छुपा के रखना पड़ता है” – राघव ने उसे पीछे से ही जोर से चिल्लाते हुए कहा ।

पर सिया ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया वह वैसे ही आगे बढ़ गई । ऐसा लगा जैसे उसने यह बात सुनी ही नहीं या शायद सुन के अनसुना कर दिया था ।।

Love Beyond Beauty: An Acid Attack Survivor Love Story
Love Beyond Beauty: An Acid Attack Survivor Love Story

सिया घर आई तो दरवाजा उसकी दोस्त दिव्या ने खोला । दिव्या और सिया एक ही साथ पीजी में रहती थी । दिव्या एक प्राइमरी स्कूल की टीचर थी और सिया सिलाई सेंटर में जॉब करती थी ।
“ क्या हुआ आज फिर तुझे देर हो गई आने में?” – दिव्या ने पूछा ।
“ मैं परेशान हो चुकी हूँ दिव्या .. वह लड़का मेरा पीछा ही नहीं छोड़ रहा है। ” – सिया ने कहा और फिर वह सिसकने लगी । दिव्या ने जल्दी से उसे गले लगाया था ।

“ मै क्या करूं दिव्या ..? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है। ” – सिया ने उसी तरह सिसकते हुए कहा ।
दिव्या ने उस के आंसू पोछते हुए कहा – “सिया पहले तू शांत हो जा । क्या हुआ मुझे आराम से बता । ”
“आज फिर से उसने मेरा रास्ता रोका । उस दिन वह घर के बाहर भी आ गया था । मुझसे ऑनर आंटी भी पूछ रही थी कि कौन है वह लड़का जो अक्सर आता रहता है… अब बता मैं क्या करूं ” – सिया ने उसी तरह सिसकते हुए बोला ।

“ सिया देख तू मुझे गलत मत समझ पर वह मुझे अच्छा लड़का लगता है। छः महीने से तेरे पीछे है। हाँ माना
रास्ता रोकता है पर कभी तुझे परेशान करने की कोशिश नहीं की । तू एक बार उसे मौका तो दे!” – दिव्या ने उसे समझाते हुए कहा।

तू मेरा अतीत जानती है फिर भी यह सब कह रही है?” – सिया ने अविश्वास से दिव्या के तरफ देखते हुए कहा ।

“ सिया सब लड़के एक जैसे नहीं होते। मैने उसकी नजरों में तेरे लिए प्यार देखा है। तू उसे एक मौका तो दे कर देख क्या पता वह तेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन जाए । देख कोई जबरदस्ती नहीं है पर एक बार आराम से इस बारे में सोचना । अच्छा अब पहले तू हाथ मुंह धो ले… थक के आई है.. आराम कर इस बारे में बाद में बात करेंगे ।” – दिव्या ने उसका सर सहलाते हुए कहा और उसके लिए खाना परोसने चली गई ।

रात गहराती जा रही थी पर सि या की आंखों में नींद नहीं थी । बहुत कुछ चल रहा था उके मन में अपना अतीत , राघव का बार बार रास्ता रोकना .. उसकी बातें सब कुछ ।
जिस लड़की का साथ उसके माँ -बाप ने नहीं दिया उसके लिए तुम दुनिया से लड़ोगे..?? सिया ने खुद से ही कहा
और उसकी आँखों से आँसू बह गए । सारी रात रोते हुए गुजरी पर सुबह तक उसने एक फैसला कर लिया था ।

सिया वापिस घर आ रही थी जब एक बार फिर राघव नेउसका रास्ता रोक लिया ।
“सि या एक बार मुझसे बात तो करो । तुम मुझे क्यों मना कर रही हो ? आखिर कमी क्या है मुझमें ? अच्छी जॉब करता हूँ , सैलरी भी अच्छी है , दिखने में भी ठीक-ठाक हूँ फिर तुम क्यों मुझे इस तरह इग्नोर करती हो? ” राघव ने बहुत प्यार से उसकी तरफ देखते हुए पूछा ।

“ सिया ने नजर उठा के उसे देखा । कितना खूबसूरत सा शख्स था वह जो उसके लिए इस तरह पागल हो रखा था पर क्या होगा जब उसे सच पता चलेगा ? .. क्या तब भी वह उसे इसी तरह प्यार करेगा …? नहीं ! वह नहीं करेगा उसे सच पता चलेगा तो वह भी उसे छोड़ देगा ! हाँ यही सही है वह उसे सब सच बता देंगी शायद इसी बहाने वह उसका पीछा तो छोड़ देगा। सिया बुत सी बनी यह सब बातें सोच रही थी कि राघव ने उसके सामने चुटकी बजाते हुए कहा – “ क्या हुआ मैडम किन ख्यालों में खो गई ? ”

सिया अपने ख्यालों से बाहर आई । उसने राघव की तरफ देखते हुए कहा – “कल दोपहर तीन बजे शिवाजी पार्क में मिलाएगा बाकी बातें वही होंगी । ” सिया इतना कह के आगे बढ़ गई । पीछे राघव मुस्कुराते हुए खड़ा रह गया ।चलो एक मौका तो मिला उसको । अब उसे पूरा विश्वास था कि वह उस खूबसूरत परी को मना ही लेगा ।
………………………..

शिवाजी पार्क , दोपहर 3 बजे | सिया और राघव पार्क के बेंच में बैठे हुए थे। अभी पार्क में लोग न के बराबर ही थे क्योंकि गर्मी का समय था और इस धूप में जल्दी कोई पार्क नहीं आता । सिया ने जानबूझ के यह समय चुना था ताकि वह दोनों किसी की नजरों में न आ जाए ।।

सिया बहुत देर से चुप बैठी थी । उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह किस तरह बात शुरू करे और राघव उसके बोलने के इंतजार में बैठा था । आखिरकार सिया ने हिम्मत की और अपने चेहरे पे लगा मास्क हटा दिया ।
राघव जो उसके बोलने का इंतजार कर रहा था उसके चेहरे से मास्क हटते ही शॉक में चला गया । सिया का दाया गाल पूरी तरह से झुलसा हुआ था । नाक की चमड़ी गाल से चिपक गई थी । होठ के भी कुछ हिस्से का साफ पता नही चल पा रहा था ।

मैं एसिड अटैक विक्टिम हूँ । आप ने कहा था न कि मैं इतनी हसीन हूँ कि अपना चेहरा मास्क से छुपा के रखती हूँ। मैं हसीन नहीं, भयानक हूँ इसलिए अपना चेहरा छुपा के रखती हूँ।” – सिया ने उसकी तरफ दखते हुए कहा ।

राघव अजीब सी कैफियत में था । वह क्या बोले उसे समझ नहींआ रहा था । वह बहुत कुछ सोच के आया था पर जो अब हो रहा था उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था । उसके मुँह से बस एक ही अल्फ़ाज़ निकला  “कैसे?? ”

सिया की नजरें झुक गई और उसने बोलना शुरू किया – मैं बहुत छोटे घर से आती हूँ। हमारे यहाँ लड़की होना अच्छी बात नहीं होती । मेरे पिताजी को हमेशा से लड़का चाहिए था पर मैं पैदा हो गई । घर में मुझसे किसी को मोहब्बत नहीं थी क्योंकि वह तो बेटा होने की आस लगा के बैठे हुए थे। माँ ने भी मुझसे कभी प्यार नहीं जताया ।

पिताजी माँ पे लड़का न होने का गुस्सा उतारते थे और माँ अपना गुस्सा मुझपे… पर जैसी भी थी जिंदगी अच्छी चल रही थी । मेरी दसवीं का रिजल्ट आया था मैं बहुत अच्छे नंबर से पास हुई थी । मैं आगे पढ़ना चाहती थी पर घर में सबने बोल दिया था कि जितना पढ़ना था पढ़ लिया अब आगे पढ़ने की कोई जरूरत नहीं है। अब चुपचाप से तुम्हारी शादी करवा दी जाएगी ।

मैं शादी नहीं करना चाहती थी । मैने पिताजी के सामने हाथ जोड़ लिए थे और न जाने कैसे उनका दिल भी पिघल गया था । उन्होंने मुझे बारहवीं तक पढ़ने की इजाजत दे दी थी । मुझे सुकून आया था कि चलो 2 साल के लिए तो शादी का चैप्टर खत्म हुआ । मैने अपनी पढ़ाई शुरू कर दी थी । सब सही था पर शायद मेरी किस्मत को मेरा खुश रहना मंजूर नहीं था ….

मेरे स्कूल में कैलाश नाम का एक चपरासी काम करता था । वह मुझसे दुगनी उम्र का आदमी था न जाने कैसे उसकी नजर मुझ पे पड़ गई । अब अक्सर वह मेरा रास्ता रोकने लगा था । मुझसे अजीब तरह की बातें करता था । मुझे यहां-वहां छूता रहता था । मैं इतनी छोटी नहीं थी कि उसकी बात नहीं पर समझ रही थी पर मैं बेबस थी किससे कहती यह सब जाके की वह मेरे साथ क्या करता है।

घर वालों को पता चलता तो वह मुझे ही घर में कैद कर देते। हर चीज का इल्जाम मुझ पे ही लगता । अब मुझे स्कूल जाने से खौफ लगता था । वह दिख जाए तो रूह कांप जाती थी ।

एक दिन जब मैं प्रिंसिपल के ऑफिस में जा रही थी तब उसने मुझे बीच में ही पकड़ लिया था । यह छोटे बच्चों की क्लास थी … उस वक्त सर्दी का मौसम था इसलिए छोटे बच्चों की छुट्टियां चल रही थी । उस दिन उसकी आँखें बहुत खतरनाक थी जैसे वह बहुत कुछ कर गुजरना चाहता हो । आगे का सोच के मेरा दिल दहल चुका था और फिर वह मुझ पे टूट पड़ा जैसे एक शिकारी अपने शिकार पे टूट पड़ता था …..

मैं उससे छूटने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह उतनी ही सख्ती कर रहा था । मेरी हिम्मत जवाब दे चुकी थी । आँखों से आँसू बह रहे थे, मैं कुछ नहीं कर पा रही थी … पर मैं हिम्मत नहीं हार सकती थी अगर आज खामोश रही तो मेरा सबकुछ बर्बाद हो जाएगा । मैंने बहुत जोर से उसके पैरों के बीच लात मारी थी । वहतिलमिला के मुझसे दूर हुआ था । मैंने जल्दी से अपने होश संभाले और दरवाजा खोल के भाग निकली । भागते हुए जाने मैं किससे टकराई और बेहोश हो गई .. ।

जब होश आया था तो अस्पताल में थी और प्रिंसिपल मैम मेरे सामने बैठी हुई थी । वह मेरी हालत देख के सब समझ गई थी । वह ही मुझे अस्पताल लेके आई थी । उन्होंने मुझे अपने ममता के आंचल में छुपा लिया था । मैने भी रोते हुए उन्हें सब बता दिया। उन्होंने मुझे बहुत हिम्मत दी , समझाया और उस चपरासी को भी स्कूल से निकलवा दिया था ।

पुलिस कंप्लेन नहीं की गई थी कि इस से स्कूल की रेपुटेशन खराब हो जाएगी और फिर वह मेरे माँ-पिताजी को भी जानती थी ।इस से मेरा भविष्य भी दाव पे लग जाता । पर हमें क्या पता था कि हमारी यह गलती हमें कितना नुकसान पहुंचा सकती थी …

उस दिन के बाद वह इंसान मुझे दुबारा कभी नहीं दिखा था । मैं भी धीरे-धीरे सम्भल गई थी । मेरा ग्यारहवीं का आखिरी पेपर था मैं पेपर देके घर वापिस आ रही थी,जब वह मुझे एक बार फिर दिखा था । उसके हाथों में कुछ था लेकिन मैं तो उस देख के ही होश गवां बैठी थी । जो जो उसने मेरे साथ किया था सब मेरी आँखों के सामने घूमने लगा और फिर उसने मुझसे मेरा अस्तित्व छीन लिया … वह बोटल उसमें एसिड था जो उसने मेरे चेहरे पे फेंका था । मैं दर्द से तड़प कर वहीं सड़क पे गिर गई थी … क्या हुआ कुछ समझ नहीं आया था ।

बस खुद की चमड़ी गलती हुई महसूस हो रही थी और वह मुझे दर्द में तड़पता हुआ छोड़ के भाग गया।

सिया की आँखों से फिर आंसुओं की धार फूट पड़ी , उसने अपने मुंह पर हाथ रख के खुद को संभालने की कोशिश की। राघव ने हिम्मत जुटा कर आहिस्ते से उसके कंधे पर हाथ रख दिया । सिया ने एक बार उसकी तरफ नजरें उठाई और फिर सर झुका के बोलना शुरू कर दिया।

7 दिन के बाद मुझे होश आया था । मैं अस्पताल में थी और एक असहनीय दर्द था जो मेरे पूरे वजूद में बह रहा था । अपने पेरेंट्स को ढूंढने के लिए नज़रे घुमाई पर वहां कोई नहीं था । शाम को प्रिंसिपल मैम मुझे देखने आई थी । मैं बोल नहीं पा रही थी पर मेरे आँखों के सवाल को उन्होंने पढ़ लिया थे।
फिर मुझे पता चला कि माँ – पिताजी को जब सारी सच्चाई पता चली तो उन्होंने मुझे ही इसका कसूरवार ठहराया । उन्हें लगता था न मैं पढ़ने जाती और न मेरे साथ यह सब होता ।

उन्होंने मुझसे उसी दिन सारे रिश्ते तोड़ दिए । एक बार अपनी बेटी के होश में आने का इंतजार भी नहीं किया था उन्होंने। उस वक्त प्रिंसिपल मैम मेरा सहारा बनी थी । उन्हें 2 बार मेरे चेहरे की सर्जरी करवाई थी । उन्हें भी पछतावा था कि काश उस दिन वह उसे सलाखों के पीछे डलवा देती तो आज यह सब न होता … पर सब काश में ही रह के खत्म हो गया ।।

प्रिंसिपल मैम से जितना हो पाया उन्होंने मेरे लिए किया था .. पर वह भी कितना ही करती । उनका भी अपना परिवार था और फिर जब अपनों ने ही साथ नहीं दिया तो गैर से उम्मीद नहीं रखनी चाहिए । उन्होंने एक एनजीओ में मेरे रहने का इंतजाम करवा दिया था । लोगों को मेरा चेहरा देख के वहशत होती और मुझे उनकी प्रतिक्रिया से , इसलिए मैं अपना चेहरा छुपा के रखने लगी ।

पढ़ाई तो अधूरी रह गई अब हिम्मत भी नहीं बची थी पढ़ने की … सिलाई बुनाई बचपन से ही की थी इसलिए एक सिलाई सेंटर में काम करने लगी । जब कुछ पैसे जमा हुए तो एक पीजी में रहने आ गई ।

“ क्या उस इंसान को सजा मिली ? ” – राघव जो इतने देर से खामोश सिया की बातें सुन रहा था वो अब कुछ बोल पाया ।

सिया जख्मी सा मुस्कुराते हुए बोली – “ सजा .. हम गरीबों के लिए कोई इंसाफ का मसीहा नहीं होता । हमारी कहानी में जुल्म भी हम पे हुआ होता है और मुजरिम भी हम ही होते है।

मैं बस आपसे इतना कहना चाहती हूँ कि प्लीज़ मुझसे दूर रहिए । मैं बहुत कुछ सह के यहां तक पहुंची हूँ अब मजीद दुख अपने दामन में नहीं भर पाऊंगी। आप बहुत अच्छे इंसान है, आप बहुत अच्छी लड़की डिजर्व करते है। मैं आपके लायक नहीं हूँ। कोई ऐसी लड़की ढूंढिए जो आपके खूबसूरती के पैमाने पर फिट बैठे और जिसे समाज स्वीकार कर सके ।

इतना कह के उसने अपने आंसू पोछे और मास्क लगा के चुप चाप वहां से उठ के चली गई । उसने एक नजर भी राघव की तरफ नहीं देखा । शायद देखती तो समझ पाती कि आँसू तो उसकी आंखों से भी बह रहे थे। उसने तो बस उसका दर्द सुना था तब उसे इतनी तकलीफ हो रही थी । उस लड़की ने तो यह सब सहा था । कितने ज़ख्म भरे है उसके मासूम दिल पर !

लोग कहते है कि दर्द बांटने से कम होता है पर दर्द बांटते वक्त वह इंसान एक बार फिर वह सब पलो के दर्द को सहता है जो वह गुजार कर आया है और उसकी तकलीफ उसे एक बार फिर अतीत में धकेल देती है।

इस बात को एक महीने बीत चुका था । उस दिन के बाद राघव की उससे कोई मुलाकात नहीं हुई थी ।

सिया अपने कमरे में गुमसुम सी बैठी थी । उसने खुद से ही बोला – “ मैं भी कितनी पागल थी जो आँखों को एक बार फिर सपने देखने की इजाज़त दे रही थी । मैं तो भूल ही गई थी मेरी किस्मत मुझे खुश रहने दे ही नहीं सकती । ”

तभी डोरबेल बजी थी । दिव्या ने जाके दरवाजा खोला तो सामने राघव खड़ा था ,अपने पैरेंट्स के साथ ।
डोरबेल की आवाज सुन के वह भी बाहर निकली थी और राघव को वहाँ देख के चौंक गई। दिव्या ने उन्हें अंदर बुलाया ।

राघव सिया के सामने आ खड़ा हुआ । उसने कहा – “ उस दिन तुमने बस अपनी बात कह दी, मेरी बात तो सुनी ही नहीं… पर अच्छा किया कि नहीं सुनी । उस वक्त में खुद कुछ समझने की हालत में नहीं था ।

जब मुझे सच पता चला तो मैंने भी तुमसे दूर जाने का फैसला कर लिया था पर यह 1 महीना तुम्हारे बिना रह के मुझे समझ आया है कि तुमने किस हद तक मुझे अपनी मोहब्बत में गिरफ्तार कर लिया है। तुम्हारे बिना जीना मौत है और मैं इतनी जल्दी मरना नहीं चाहता । ” आखिरी बात राघव ने मजाक के लहजे में कही थी ।

पर सिया तो कुछ समझ ही नहीं पा रही थी । उसने कहा – “ आप पागल हो चुके है। यह सब आप सिर्फ जोश में कह रहे है। जब दुनिया आप पे हंसेगी तब आपको पता चलेगा । कह देने और कर देने में अतंर होता है और प्लीज़ मेरी कहानी सनु के मुझ पर रहम मत खाइए ।  मुझे किसी के रहम की जरूरत नहीं है। ”
“ तुम्हें लगता है मैं तुम पे रहम कर रहा हूँ… नहीं सिया रहम तो तुम करोगी मुझ पे मेरी जिदंगी में आके । मुझे तुम्हारे अतीत से कोई फर्क नहीं पड़ता है , मैं तुम्हारे साथ अपना भविष्य बनाना चाहता हूँ।
आप देख सकते है कि मेरे चेहरे की हालत क्या है उसके बाद भी…!

मैंने कहा न ! मुझे तुम्हारी रूह से मोहब्बत हो चुकी है और ये मोहब्बत किसी भी तरह मिटाई नहीं जा सकती है। मैं जानता हूँ जो पीछे हुआ है उसका असर काफी गहरा पड़ा है तुम पर। लेकिन मैं वादा करता हूँ कि तुम्हारा आने वाला कल बहुत खूबसूरत बना दूंगा । बस मुझे एक बार मौका दे कर तो देखो प्लीज।
राघव ने आगे बढ़कर सिया के दोनों हाथ अपने हाथों में लिए और उसकी आँखों में देखने लगा। सिया अब भी किसी असमंजस में उलझी राघव के चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रही थी।

“ हाँ बेटा प्लीज़ हमारी बात मान लो .. जो कुछ हुआ उसमें तुम्हारा कोई कसूर नहीं था और अतीत की चद्दर में छुप के भविष्य को बिगाड़ा नहीं करते है। जिदंगी दूसरा मौका दे रही है। इसे अतीत की भेट मत चढ़ाओ । ” – राघव की माँ ने उसकी उलझन को दूर करते हुए कहा ।

“तुम हमारे बेटे को सम्भाल लो रही दुनिया समाज की बात तो उसे हम लोग सम्भाल लेंगे । ” राघव के पापा ने बहुत ही दुलार से सिया को बोला ।
“अब हाँ भी कर दे पागल । ” दिव्या ने उसे जोर देते हुए कहा।

और सिया जो बचपन से ही इस तरह के प्यार को तरसी हुई थी उन सब की बात सुन के टूट कर रोने लगी । वह भी तो एक मासमू दिल की लड़की थी जिसने सिर्फ मोहब्बत मांगी थी पर किसी ने उसे कभी इस लायक ही नहीं समझा ।

और फिर 1 सप्ताह बाद राघव के मम्मी पापा और दिव्या की मौजदूगी में राघव और सिया ने कोर्ट मैरिज कर ली थी ।।

आगे वाली जिदंगी मुश्किल होगी पर खुशी इस बात है कि अब सिया अकेली नहीं बल्कि उसका हमसफर भी उसके साथ है। राघव ने न सिर्फ सिया को अपनाया बल्कि उसका खोया हुआ आत्मविश्वास भी लौटाया । सिया ने एक बार फिर अपनी पढ़ाई शुरू कर दी थी । धीरे-धीरे ही सही पर अब वह खुद के लिए बोलना शुरू कर रही थी । उसने अपने जैसी बहुत सी एसिड विक्टिम के लिए आवाज उठाई थी और इसमें राघव ने उसका हमेशा साथ दिया ।।

कुछ मोहब्बत चेहरे या जिस्म से नहीं रूह से की जाती है। राघव की मोहब्बत भी ऐसी थी बिल्कुल पाक ..
….

ये सिर्फ एक कहानी थी इसीलिए सिया को राघव मिल गया लेकिन असल जिंदगी में ऐसा होना बहुत मुश्किल होता है । इस देश में हर साल लगभग 110 के करीब सिया (Acid Attack Survivors ) हमें देखने को मिलतीं हैं लेकिन हर सिया के पास राघव नहीं होता । मैं ये नहीं कहती कि राघव जैसे लोग इस दुनिया में नहीं होते पर उनकी तादाद बहुत कम है। दुनिया कैलाश जैसे लोगों से भरी पड़ी है जो लड़कियों को अपना खिलौना समझते है ।

कड़वी सच्चाई तो यह है कि हमें सिया जैसी लड़कियों से हमदर्दी तो बहुत होती है, उनपे तरस भी आता है पर हम कभी उन्हें अपना नहीं पाते हैं। उन्हें हमारे तरस की नहीं हमारे साथ की जरूरत है।

उम्मीद हैआपको कहानी पसदं आई होगी ।।
                           

             यह कहानी हमारी नियमित पाठक – अंजली द्वारा लिखी गई है।

Thanks for Reading 🙏 🙏

  1. My trophy Wife ! Romantic Love story in Hindi
  2. My trophy Wife! Romantic love story part 2
  3. My trophy Wife ! Romantic Love story in Hindi pt-3
  4. My trophy Wife ! Love story in Hindi pt 4
  5. My trophy Wife ! Love story in Hindi pt 5
  6. My trophy Wife ! Love story in Hindi pt 6
  7. My trophy Wife ! Love story in Hindi pt 7
  8. My trophy Wife ! Love story in Hindi pt 8
  9. My trophy Wife ! Love story in Hindi pt 9
  10. My trophy Wife ! Love story Last Part -10
  11. Dark Romance love story in hindi 
  12. Miss Photogenic a short love story in hindi
  13. इश्क़ का अनोखा इजहारनामा College going love story 

Leave a comment