Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 7

Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 7

Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple कहानी के भाग 6 में आपने पढ़ा कि अन्विका के एग्जाम्स के लिए विक्रांत दानियाल को घर पर गाइड करने के लिए बुला लेता है। अन्विका की पढ़ाई का सारा सामान अपने स्टडी रूम में रखवा देता है। अन्विका अपने कमरे में पढ़ने की जिद करती है तो विक्रांत उसे अपने साथ बेडरूम शेयर करने की धमकी दे देता है। पहले ही दिन दानियाल को पता चल जाता है कि विक्रांत और अन्विका साथ ही रहते हैं।
दानियाल के जाने के बाद अन्विका स्टडी रूम का लॉक ठीक न होने की बात कहती है जिसे विक्रांत बाद में ठीक करवाने को बोल देता है। अन्विका की क्लॉस 7 बजे खत्म होती है जिसके बाद कोई न कोई रूम में आकर उन्हें बाहर चलने को बोल देता है। दानियाल को लगता है कि ये सब विक्रांत के इशारे पर हो रहा है इसीलिए एक दिन वो खुद विक्रांत से बोल देता है कि वो अन्विका के पीछे न पड़े क्योंकि अन्विका उसकी कभी नहीं हो सकती है। विक्रांत दानियाल को अपने और अन्विका के रिश्ते का सच बता पता तब तक वहाँ अन्विका आ जाती है । उसे देखकर दोनों शांत हो जाते हैं।  अब आगे –

ये सिर्फ एक दिन की बात नहीं थी । उस दिन के बाद से दानियाल विक्रांत से बहस करने और उसे नीचा दिखाने की कोई न कोई हरकत करता रहता था । विक्रांत इन बातों को इग्नोर कर रहा था क्योंकि वो नहीं चाहता था कि अन्विका की पढ़ाई पर कोई असर आए और फिर वो उससे बात करना भी बंद कर सकती है।

एक दिन दानियाल से स्टडी रूम के फ्लोर पर पानी गिर गया था । अभी तक अन्विका कमरे में नहीं आई थी इसीलिए हाऊस हेल्प को क्लीनिंग के लिए उसे ही बुलाना था । वो चाहता तो खुद आवाज लगाकर किसी को बुला सकता था लेकिन उसने जानबूझ कर विक्रांत को कॉल किया और उसे कमरे में हेल्पर को भेजने कहा।
उसने कॉल कट ही किया था कमरे में अन्विका आ गई।

आगे मत बढ़ना आगे पानी….! दानियाल का वाक्य पूरा होने से पहले ही अन्विका का पैर फिसल गया । इससे पहले वो नीचे गिरती दानियाल ने दौड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया ।
खुद को दानियाल की कसी हुई पकड़ में पा कर अन्विका एकदम ब्लैंक हो गई , उसकी आँखें दानियाल के चेहरे से हटी ही नहीं और न दानियाल ने ही उसे निहारना बंद किया ।

हॉस्टल में रात को सोते समय अन्विका ने कई बार दानियाल के साथ ऐसे मोमेंट्स सोचे थे , इसके बाद वो क्या करेगी, ये भी उसने सोच रखा था । लेकिन पता नहीं आज ऐसा होने पर वो न वैसा कुछ सोच पा रही है और न कर पा रही है। उसे इस मोमेंट में एक्साइटेड होना चाहिए लेकिन उसके अंदर जो हो रहा है वो एक्साइटमेंट तो बिल्कुल नहीं है ।

 

 

दानियाल ने आहिस्ते से उसके चेहरे पर आएं बालों को साइड किया लेकिन वो अब भी समझ नहीं पा रही कि वो कैसे रिएक्ट करे । तभी कमरे का दरवाजा बहुत तेजी से खुलता है और दोनों चौक जाते हैं और दानियाल उसे और कस के  पकड़ लेता है। सामने विक्रांत को देख कर अन्विका होश में आती है और दानियाल को धक्का दे कर अलग करती है ।

विक्रांत मै फिसल गई थी और…सर ने मुझे सम्भाल लिया। अन्विका विक्रांत की जलती आँखों और कसती मुट्ठियों को देख कर अपनी सफाई पेश करने लगी ताकि वो कुछ गलत न समझे ।
मैम आपसे कुछ बात करनी है। विक्रांत बिल्कुल उसके करीब होकर बोला ।

अभी नहीं मैं पढ़ाने जा रहा हूँ। दानियाल ने विक्रांत के सीने पर हाथ रख के उसे पीछे करने की कोशिश की।
विक्रांत ने उसकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया वो बस लगातार अन्विका को ही देखे जा रहा था।

मैम….!
मैं बाद में बात करती हूँ विक्रांत। वो जानती थी कि इतने गुस्से में विक्रांत से बात करना ठीक नहीं है।
उसकी बात सुनते ही विक्रांत ने आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ लिया ।

मुझे अभी बात करनी है। उसका हाथ पकड़ के वो कमरे से बाहर ले जाने लगा तो दानियाल ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन हाऊस हेल्प ने उसे तुरंत रोक लिया ।
आप वहाँ नहीं जा सकते हैं।

विक्रांत उसे खींचते हुए अपने बेडरूम में लाया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया ।
विक्रांत तुम हर चीज गलत तरीके से क्यों लेते हो ?
हो सकता है मैंने गलत देखा तो अब तुम मुझे बता दो कि वहाँ क्या हुआ था ? विक्रांत गुस्से में गहरी गहरी साँसे ले रहा है।
मैं कमरे में गई और मुझे नहीं दिखा कि नीचे पानी है मेरा पैर फिसल गया ।

आगे क्या हुआ ? वो बेचैनी से इधर उधर घूमते हुए बार बार अपने बालों में हाथ फिराने लगा।
मैं गिरती इससे पहले ही सर ने मुझे पकड़ लिया ।
इन सब में कितना टाइम लगना चाहिए था ?

तुम्हें नहीं पता है कि क्विक रिफेक्सिव मूवमेंट्स कैसे काम करतें हैं ? ऐसा तो नहीं है कि घंटे भर लग गएं हो बस कुछ सेकंड्स ही लगते हैं इस तरह किसी की मदद करने में ।

तो तुम पाँच मिनट तक उसकी बांहों में क्या कर रही थी? उसने बहुत तेजी से मेज पर पंच किया ।
विक्रांत…! वो थोड़ा सहम गई ।
बोलो ! विक्रांत की आवाज तेज हो गई।
सर मुझे नहीं छोड़ रहें थें…।

तो ठीक है अब मैं तुम्हारे सर को नहीं छोडूंगा । वो दरवाजा खोलने के लिए आगे बढ़ा लेकिन अन्विका दौड़ के दरवाजे से चिपक के खड़ी हो गई।
रास्ते से हटो ।
विक्रांत तुम उन्हें कुछ नहीं करोगे समझ गए ।
नहीं …बिल्कुल भी नहीं समझा । उसने अन्विका को अपनी तरफ खींच कर दरवाजा खोल लिया ।

तुम्हारी वजह से मैं पहले ही बहुत कुछ झेल रही हूँ प्लीज अब और झेलने की ताकत नहीं है मुझमें । उसने बहुत कसके विक्रांत का हाथ पकड़ रखा था।
उसकी ये बात सुनकर विक्रांत का गुस्सा एकदम से गायब हो गया और वो खुद को एक विलेन जैसा महसूस कर गया ।
अन्विका उसे उसी हालत में छोड़कर बेडरूम से निकल गई । थोड़ी देर बाद तक विक्रांत के कमरे से चीजों के गिरने और सिसकने की आवाजें आतीं रहीं।

रात में जब विक्रांत डिनर के लिए नहीं आया तो अन्विका खुद उसके कमरे में गई । उसका कमरा शाम के मुकाबले काफी बदल गया था या कहा जाए कि खाली हो गया था। पर्दे , आर्ट वर्क्स , वॉश, फ्रेम्स ये सब अपनी- अपनी जगह पर अपने निशान छोड़ गएं थे और कुछ निशान विक्रांत के हाथों पर भी ।
वो सो चुका था और उसके एक हाथ में पट्टी बंधी हुई थी और दूसरे में बैंडेज लगे हुए थे । अन्विका उसे सोता देख कर चुपचाप निकल आई ।

अगले दिन विक्रांत को शांत बैठा देख कर दानियाल लिविंग रूम में ही रुक गया।
ओह !बहुत बुरा लग रहा है तुम्हारे हाथों को देख कर । कहते हैं न किसी और के हिस्से को छीनने की कोशिश करो तो अपना भी चला जाता है।
मैं आज बहस करने के मूड में नहीं हूँ तो प्लीज आप यहाँ से जा सकतें हैं।
मैं बहस करने नहीं आया मैं सिर्फ ये बोलने आया हूँ कि पास ही एक रेस्टोरेंट है वहाँ से चीज पास्ता ले आओ जाकर ।

पहली बात तो ये कि मैं आपका नौकर नहीं हूँ और दूसरी बात कि अगर इतनी ही भूख लगा करें तो खा कर आया करो ।
मेरे न सही अन्विका के नौकर तो हो और इसी हैसियत से तुम्हें मेरे आगे भी झुकना चाहिए ।
सर …सर! आप चलिए न मैं अभी चीज पास्ता बनवा रहीं हूँ…. । मधुर उन दोनों की बहसबाजी देख कर बीच में आ गई लेकिन उसकी बात पूरी सुने बिना ही दानियाल फिर बोल पड़ा ।

नहीं! मुझे घर का बना नहीं खाना हैं।
ठीक है सर मैं खुद जाकर ले आऊंगी आप पढ़ाने जाइए ।
ये क्यों नहीं जा सकते हैं हाथों में मेंहदी लगी है क्या…! ओह सॉरी सॉरी मैं तो भूल ही गया इनके तो इस वक्त हाथ ही टूटे हुए हैं। दानियाल ने विक्रांत पर तंज कसा और मुस्कुराते हुए आगे निकल गया।

विक्रांत के मन में आया कि वो अभी और इसी वक्त दानियाल की गर्दन दबोचकर फर्श पर पटक दे और उसे उसकी असली औकात दिखा दे लेकिन वो ऐसा बिल्कुल नहीं कर सकता था । अपनी इस बेबसी पर उसकी आँखों में आँसू आ गएं। विक्रांत को डर लगता है कि अगर उसने दानियाल को कुछ किया तो अन्विका उससे बोलना बंद कर देगी हमेशा के लिए और अगर ऐसा हुआ तो उसके पास कुछ नहीं रह जाएगा । एक ही सबसे कीमती और जरूरी चीज बची है उसके पास – अन्विका! उसे खोने का खतरा वो एक इंच भी नहीं ले सकता है ।

भले ही इस झगड़े के बाद उसका अन्विका से बात करने का मन नहीं हो रहा है लेकिन फिर भी उसे देखने भर से भी विक्रांत को राहत पहुंच रही है।

दो-तीन दिन तक विक्रांत और अन्विका में बातचीत नहीं हुई न ही ऑफिस में काम के सिलसिले में और न घर में किसी चीज को लेकर ।
अन्विका जानती है कि भले ही ये रिश्ता नहीं चलेगा , भले ही वो सिर्फ इस्तेमाल के लिए इस रिश्ते से बांधी गई हो , भले ही विक्रांत सिर्फ उसे अपने दबाव में रखने की कोशिश कर रहा हो लेकिन फिर भी वो एक रिश्ते में तो हैं। अपनी नजरों में न सही लेकिन दुनिया की नजरों में तो प्रकाश बंसल की बहू है । यही सब बातें सोच कर अन्विका ने विक्रांत से बात करने की कोशिश की लेकिन उसने उसे अनदेखा कर दिया ।

ऑफिस की टेंशन , प्रकाश सर के ताने ,एग्जाम्स की हैवी प्रिपरेशन , तीन दिनों से बढ़ी हुई बेचैनी , विक्रांत का असहयोगी बर्ताव और पीरियड्स की तकलीफ ने अन्विका के शरीर को तोड़ दिया और वो पढ़ते पढ़ते ही अपनी नोटबुक पर गिर पड़ी ।
अन्वी…! दानियाल ने उसे पुकारा ।

अन्विका..! उसने आहिस्ते से उसे हिलाया ।
Damn…! उसे छूते ही वो समझ गया कि अन्विका बेहोश हो चुकी है।

उस दिन की घटना के बाद कोई न कोई उन दोनों पर नजर जरूर रखता था इसीलिए विक्रांत को स्टडी रूम में पहुंचने में देरी नहीं हुई।
अन्विका मैम …! उसने धीरे से अन्विका के बालों को साइड किया।
वो बेहोश है और मैं उसे हॉस्पिटल ले जा रहा हूँ। दानियाल खड़ा होकर कोट पहनने लगा।

मिसेज बंसल …!
दानियाल ने जैसे ही झुक कर अन्विका को उठाने की कोशिश की वैसे ही उसके हाथ रुक गएं।
मिसेज अन्विका विक्रांत बंसल… ! मधुर , डॉक्टर को कॉल करो इमेजिएटली। विक्रांत ने अन्विका को अपनी गोद में उठा लिया।

Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 7
Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 7

 

सर,  मैम को कमरे में ले कर लिटाना चाहिए । मधुर ने फोन करते हुए कहा ।
कमरे से निकले से पहले विक्रांत ने घूम कर दानियाल की तरफ देखा जो अभी भी कुर्सी के पास नीचे बैठा हैरानी से उसे देख रहा था ।
डॉक्टर दानियाल आज कोई क्लॉस नहीं हो पाएगी । उसने जानबूझ कर डॉक्टर शब्द पर ज्यादा जोर दिया ताकि उसे अहसास करा सके कि वो ऐसा डॉक्टर है जिसे अन्विका एक मरीज की तरह भी नहीं मिल सकती पार्टनर की तरह तो बहुत दूर की बात है।

अन्विका को थोड़ी ही देर में होश आ गया था और वो वापस पढ़ने के लिए उठ बैठी ।
चुपचाप लेटी रहो । विक्रांत बिस्तर के किनारे ही बैठा था।
सर चले गएं?

तुम्हें सर की ज्यादा परवाह है या खुद की ?
सिर्फ मेरी पढ़ाई की फिक्र है मुझे । उसने चादर फेंकते हुए कहा।

तुम यहीं रहो अन्विका । दानियाल उसके कमरे में आ गया ।
मैं नोट्स ले आया हूँ यहीं पढ़ो अगर कुछ समझ न आए तो मुझे बताना मैं यहीं बैठा हूँ। दानियाल उसकी किताबें साइड में रख कर खुद चेयर खींच कर बैठ गया । एक बार उसने नजर उठा कर विक्रांत की तरफ देखा और विक्रांत ने भी उसकी तरह देखा ।

मधुर …! उसने थोड़ी तेज आवाज लगाई ।
हाँ सर ! कुछ चाहिए ।
मुझे लगता है कि इस कमरे की वाइब ठीक नहीं है इसीलिए मैम बीमार हुई हैं। कल इस कमरे का सारा फर्नीचर हटवा देना सिर्फ बेड ही रहेगा कमरे में ।

विक्रांत ऑफिस के कामों में उलझा हुआ था जब उसे मधुर की कॉल आई । वो तुरंत सबकुछ छोड़ कर घर के लिए निकल गया ।
जब वो बेडरुम में पहुंचा तब तक अन्विका ने अपना सारा सामान पैक कर लिया था ।

कहाँ जा रही हो इतनी रात में ?
तुम्हारे लिए अच्छा यही होगा कि मेरे सामने से हट जाओ।
लेकिन हुआ क्या है ? विक्रांत ने जैसे ही उसे छूने के लिए हाथ बढ़ाया वो तुरंत भड़क गई ।

छूना मत दूर से ही बात करो ।
मुझे कुछ बताओगी या सिर्फ गुस्सा ही करती रहोगी ? वो उसके सामने खड़ा हो गया ।
तुम एक झूठे इंसान हो और झूठे इंसान के साथ रहना मुझे बिल्कुल मंजूर नहीं । अन्विका उसे साइड करके जाने की कोशिश करने लगी लेकिन विक्रांत ने उसकी बांह पकड़ के रोक लिया ।

अच्छा कौन सा झूठ बोला मैंने जो मुझे ही नहीं पता है?
विक्रांत मैंने तुमसे पहले ही कहा था कि तुम्हारा मेरा रिश्ता क्या है ये बात सर को पता नहीं चलनी चाहिए तो तुमने उन्हें क्यों बताया ? अब जब तुम अपने मन की कर ही चुके हो तो मैं भी वही करूंगी जो कहा था । अन्विका ने उसका हाथ पकड़ के झटक दिया ।

मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया है…
एक और झूठ ! तुम्हें शर्म आती है थोड़ी भी इतनी घटिया से घटिया हरकतें करते जा रहें हो फिर भी सीना तान का कहते हो मैंने नहीं किया ।

अन्विका प्लीज! जो भी बोल रही हो थोड़ा सोच समझ कर बोलो । मेरे बर्दाश्त की भी एक सीमा है और तुम उसे ही तोड़ रही हो ।
अन्विका अभी तक पूरी कोशिश करके अपने गुस्से और दर्द को दबाए जा रही थी लेकिन विक्रांत की इस बात पर वो फट पड़ी ।

क्या कहा तुमने कि मैं सोच समझ कर बोलूं? ठीक उसी तरह न जैसे तुम सारे काम बहुत सोच समझ कर करते हो । जैसे तुमने अभी तक स्टडी रूम का लॉक नहीं ठीक करवाया है कुछ सोच समझ कर ही न । बहुत-बहुत , बहुत ज्यादा ही गणित लगा लिया है तुमने हर चीज में विक्रांत बंसल । मैं तो हैरान हूँ कि तुमने इतना अकेले कैसे सोच समझ लिया होगा दानियाल को बेडरुम में न आने देने, स्टडी रूम का लॉक खराब करने….

अन्विका तुम शांत होकर पहले मेरी बात सुनो …!
मैं सुनूं ? मैं क्यों सुनूं ? कहने सुनने को कुछ रखा है तुमने? बीवी नहीं हूँ तुम्हारी ये अच्छे से जानती हूँ मैं लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं है कि मैं बाजारू औरत हो गई ….

तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है….

मेरा दिमाग ? अरे मेरे पास दिमाग होगा तब खराब होगा न । नहीं है मेरे पास दिमाग अगर होता तो पहले ही समझ जाती कि तुम इतना घटिया सोचते हो मेरे बारे में। तुम्हें क्या लगा कि अगर लॉक ठीक हो जाएगा तो पढ़ने के बजाय मैं उसके साथ सोने लगूंगी। मुझे समझ नहीं आ रहा जब इतनी गंदी सोच थी तुम्हारी तो उनको बुला कर ही क्यों लाएं ? जरूर टेस्ट करने के लिए ही लाए होगे कि कहीं मेरी जवानी काबू से बाहर तो नहीं हो जा रही है… !

Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 7
Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 7

 

अन्विका….! विक्रांत अपनी मुट्ठियां भींचते हुए बोला ।

अन्विका रोते हुए कमरे से बाहर निकल गई । दरवाजे पर पहुंची तो वो लॉक था । उसने लॉक हिलाया फिर भी नहीं खुला, अपनी फिंगरप्रिंट से खोलने की कोशिश की लेकिन वो स्कैन नहीं हुई । आज शाम तक उसकी फिंगरप्रिंट से ये दरवाजा खुल रहा था लेकिन अब उसका Recognition failed हो जा रहा है। वो समझ गई कि ये विक्रांत ने किया है। अपना सामान दरवाजे के पास छोड़ कर वो वापस कमरे की तरफ चल दी।

Thanks for Reading.

WAIT FOR THE NEXT PART .

Read more stories like this…..

Leave a comment