Secret SEO: Love Story of a Corporate Power Couple pt 8

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कहानी के 7 भाग में आपने पढ़ा कि दानियाल किस तरह विक्रांत को हर वक्त नीचा दिखाने की कोशिश में लगा रहता है। उन दोनों के रिश्ते के बारे में जाने बिना ही वो विक्रांत को नौकर समझता है। पर विक्रांत इन बातों को अनदेखा कर रहा था। लेकिन एक दिन जब स्टडी रूम में पानी से फिसल जाने के कारण दानियाल ने अन्विका को अपनी बांहों में भर लिया और छोड़ा नहीं , ये देख कर विक्रांत का दिमाग घूम गया ।

उसने दानियाल को अपनी शादी के बारे में बताने का सोचा तो अन्विका ने उससे कहा कि उसकी जिंदगी में अभी तक विक्रांत की वजह से बहुत दिक्कतें आई हैं, अब वो और मुश्किल न खड़ी करे। इस बात को सुनकर विक्रांत शांत पड़ गया और उस दिन से अन्विका से बात करनी छोड़ दी। तीन दिन तक विक्रांत की बेरुखी और बहुत सारे काम की वजह से अन्विका बेहोश हो गई। दानियाल ने जब उसे उठाने की कोशिश की तो विक्रांत ने उसे अपने नाम से बुलाकर दानियाल के सामने स्थिति स्पष्ट कर दी ।

अगले दिन जब ये बात अन्विका को पता चली तो वो घर छोड़ कर जाने लगी । जब गेट पर पहुंची तो दरवाजा खुला ही नहीं और न उसके फिंगरप्रिंट्स ही स्कैनर पर आएं । वो गुस्से में फिर से कमरे में वापस आई।

दरवाजा खोलो मुझे मेरे फ्लैट पर जाना है अभी के अभी। कमरे में जाते ही वो फिर से विक्रांत पर चिल्लाने लगी । विक्रांत ने कोई जवाब नहीं दिया बस अपना फोन पकड़े कुछ करता रहा ।
तो तुम नहीं खोलोगे न ? अन्विका विक्रांत के हाथ से उसका फोन छीन कर दरवाजे का लॉक खोलने की कोशिश करने लगी । पासवर्ड , फिंगरप्रिंट्स किसी भी तरफ से लॉक नहीं खुल रहा था ।

ये सिर्फ तुम्हारी फिंगर्स से खुलेगा ।

बस बहुत तमाशा कर लिया अब मेरी बात सुनो । विक्रांत ने फोन उसके हाथ से छीन लिया और उसकी कलाई पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया ।
अभी ये जो इंटरप्रेटेशन सुनाया है तुमने ,ये तुम्हारा ही है या तुम्हारे दानियाल सर ने इसकी भी क्लॉस दी है तुम्हें?
सब तुम्हारी तरह घटिया नहीं होते हैं समझ गए तुम । अन्विका ने उसे धक्का देकर दूर करने की कोशिश की लेकिन उसने और कसके उसे पकड़ लिया ।

ये जो अभी तुमने बहुत ही बेहतरीन शब्द इस्तेमाल किए हैं अपने लिए ,कसम से बता रहा हूँ तुम्हारी जगह कोई और होता तो उसकी जुबान के इतने टुकड़े करता , इतने टुकड़े करता की माइक्रोस्कोप से देखने पर भी गिनने में न आते ।
हद है तुम्हारी बेशर्मी की भी तुम्हारी जगह कोई होता तो मेरे सामने खड़ा भी नहीं हो पाता लेकिन तुम मुझे ही आँखें दिखा रहे हो ।
अब बेशर्म बोल ही दिया है तो मैं फिर सबकुछ खुल कर पूछ ही लेता हूँ। मुझे अपने और दानियाल के बीच का रिश्ता बताओ ।

अनाथ हूँ मैं इसका मतलब ये नहीं है कि कोई भी आकर बाप बन जाएगा मेरा । तुम एक अधिकारी हो और मैं तुम्हारी कर्मचारी इससे ज्यादा कुछ बनने की कोशिश मत करो ।
तुमने जवाब नहीं दिया मैंने जो पूछा ? विक्रांत ने अन्विका के कानों के पास जाकर कहा ।
मुझे जाने दो क्योंकि मैं तुम्हारे किसी भी फालतू सवाल का जवाब नहीं दूंगी ।

तो तुम दोनों का सच में कुछ चल रहा है ?
और कितनी बार बताऊं तुम्हें कि वो मेरे सीनियर हैं और एक अच्छे दोस्त भी । अब क्या ये बात मैं अपने माथे पर लिख कर घूमती रहूं तभी तुम्हें सुकून मिलेगा । अन्विका ने चीखते हुए बोला था ।

 

और तुम्हारे दानियाल सर क्या सोचते हैं..?
कुछ भी सोचते होंगे पर तुम्हारे जितना घटिया तो नहीं ही सोचेंगे ।

प्यार करता है वो तुमसे । विक्रांत ने उसकी आँखों में आँखें डाल कर बहुत ही मुलायम आवाज में बोला।

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तुम कोई पहले नहीं हो कॉलेज में भी लोग ऐसी बातें सोचा करतें थे। लेकिन वो तब भी मुझसे दूरी बनाकर रखते थे और …

 

नहीं आती…तुम लड़कियों को हम मर्दों की आँखें पढ़नी नहीं आतीं हैं। मैं जब पहली बार उससे मिला था तभी समझ गया था कि तुम्हें जिस इंसान पर क्रश है उसे भी तुमसे प्यार है। फिर उसने खुद ये बात मेरे सामने एक्सेप्ट की है….

तुम एक बेवजह की बात करके ये साबित करने की कोशिश कर रहे हो कि तुमने जो किया वो सही था ?
मैंने क्या किया ? सिर्फ अपनी पत्नी को अपने प्यार को…
नहीं हूँ मैं तुम्हारी पत्नी …! ये भ्रम जितनी जल्दी हो सके अपने दिमाग से निकाल दो ।

मिसेज अन्विका वर्मा बंसल ..! जब तक तुम खुद तलाक के कागजों पर साइन नहीं करती तब तक मैं तो क्या पूरी दुनिया ही तुम्हें मेरी पत्नी कहेगी । जबकि मैं जानता हूँ कि तुम मुझसे प्यार नहीं करती , मैं ये भी जानता हूँ कि तुम दानियाल को पसंद करती आई हो और तो और वो लड़का मुझसे खुद आकर बोलता है कि वो तुम्हें मुझसे अलग करके ही मानेगा । अब तुम्हीं बताओ जब तुम्हें पत्नी माना हैं तो क्या तुम्हें ऐसे ही किसी और की हो जाने दूं ? बताओ मेरी जगह तुम होती तो क्या करती ?

विक्रांत की आँखों से गुस्से के साथ बेबसी भी झलक रही थी । वो बस एक सटीक जवाब सुनना चाहता था अन्विका के मुंह से जो उसे थोड़ा सा भरोसा दिला सके।

विक्रांत मुझे नहीं पता सर ने तुमसे क्या कहा है ? लेकिन मैं इतना जानती हूँ कि अभी मुझे तुम दोनों में से कोई नहीं चाहिए । प्लीज मुझे फोर्स करना बंद करो । अगर तुम्हें लगता है कि हम दोनों करीब होंगे तो कुछ हो जाएगा तो ऐसा कुछ भी नहीं है।
अन्विका जब इतनी देर में खुद को उसकी पकड़ से आजाद नहीं करा पाई तो अपना मुंह दीवार की तरफ घुमा लिया था ।

विक्रांत ने उसके चेहरे को फिर से अपनी तरफ घुमाते हुए पूछा – अगर ऐसा ही था तो उस दिन तुम खुद को क्यों नहीं छुड़ा सकी थी उसकी बांहों से । पिछले दस मिनट में 12-15 बार तुमने मेरी बांहों से छूटने की कोशिश की है लेकिन उस दिन तुम 5 मिनट में एक बार भी हिली तक नहीं थी । ऐसा क्यों हुआ था अन्विका ?

अन्विका को सच में उस दिन पता तक नहीं चला था कि वो कितनी देर तक दानियाल की पकड़ में थी । आज जब विक्रांत ने उससे सवाल पूछा तो उसके पास कोई जवाब ही नहीं बचा था ।

लो तुम जिस बात का जवाब तक नहीं दे पा रही हो तुम्हें लगता है कि तुम उस चीज का विरोध कर सकती थी ! सोच कर देखो क्या होता अगर जब दरवाजा लॉक होता अंदर से तो ? वो तुम्हारे और करीब आता उसका जो मन करता वो सब करता तुम्हारे साथ और तुम उसी तरह बुत बनी खड़ी रहती क्योंकि वो इंसान कभी तुम्हारे दिलों दिमाग पर हावी रह चुका है उसे मना कर पाना आसान नहीं है तुम्हारे लिए । सोच कर बताओ मुझे कि मैं कुछ गलत बोल रहा हूँ क्या ?

विक्रांत ने थोड़ा रुक कर अन्विका के जवाब का इंतजार किया।

तुम्हें क्या लगता है कि जब मेरे घर में आने वाले हाउस हेल्पर्स तक की पूरी कुंडली निकाली जाती है तो क्या तुम्हारे सर की नहीं निकाली गई होगी । उनके बारे में तो मैंने खुद सब पर्सनली पता किया था । मैं तो चाहता भी नहीं था कि उसे यहां पर लाऊं लेकिन तुम्हारी प्राइवेसी के लिए मुझे मेरा एगो  साइड में रखना पड़ा । अगर तुम्हें लगता है कि तुम्हारे लवर को इसलिए लाया ताकि तुम्हारे कैरेक्टर का टेस्ट ले सकूं तो यहाँ पर तुम्हारी सोच गलत है मेरा इरादा गलत नहीं है। सिर्फ अपना ही क्यों कहूं मुझे तो दानियाल का इरादा भी गलत नहीं लगता है तुम्हारे लिए।

लेकिन बात सिर्फ इतनी है कि जब हम किसी से प्यार करते है तो कितनी जल्दी बहक जाते हैं हमें खुद भी नहीं पता चलता है। जिंदगी में पहले ही बहुत घाटा खा चुका हूँ अब और नहीं खाना चाहता था इसीलिए मैंने ये सब किया । लेकिन तुमने तो पता नहीं थोड़ी ही देर में मुझे क्या क्या सोच लिया ! वो सब बोलते हुए एक बार सोचा तक नहीं कि मुझ पर क्या गुजर रही होगी । विक्रांत ने अपनी पकड़ ढीली कर दी और अपने हाथ जेब में कर लिए ।

तुम्हें पता है अगर मैं तुम्हें दानियाल के साथ बिस्तर पर सोते हुए भी देख लेता तब भी इतना गंदा नहीं सोच पाता। वो भारी कदमों से अन्विका के सामने से हट गया।

….और हाँ प्लीज यहाँ से जाने की कोशिश मत करना क्योंकि तुम्हारा फ्लैट अब किसी और ने रेंट पर ले लिया है। कमरे से निकलते वक्त विक्रांत ने ये आखिरी बात कही थी ।

रात में बहुत देर तक विक्रांत ड्रिंक्स पीता रहा । जब घड़ी में एक बज गएं तो वो अन्विका के कमरे की चल दिया।
जैसा कि उसने सोच रखा था अन्विका वैसे ही फर्श पर सिमटी सो रही थी । विक्रांत को कभी समझ में नहीं आता है कि जब भी कोई बड़ी स्ट्रेसफुल सिचुएशन उसकी जिंदगी में आती है वो हमेशा बिस्तर छोड़ कर फर्श पर ही क्यों लेट जाती है। क्या सच में ऐसा करने से नींद आ जाती हैं? एक दिन खुद ऐसा करके देखेगा । यही सब सोचते- सोचते विक्रांत ने उसे नीचे से उठा कर बिस्तर पर आकर सुला दिया ।

अन्विका को अहसास हो गया था कि उसने कुछ ज्यादा ही बोल दिया है विक्रांत को । लेकिन फिर भी उसके पास जाकर माफी मांगने का मन नहीं हुआ उसका । लेकिन अपने अंदर के गिल्ट को दूर करने के लिए उसने दानियाल को रोज आने से मना कर दिया । उसने हफ्ते में सिर्फ दो बार ही आकर उसके नोट्स में हेल्प करने के लिए कहा ।

ऐसा तुम विक्रांत के कहने पर कर रही हो ? उसने अपने नोट्स बैग में रखते हुए अन्विका से पूछा ।
नहीं सर , मैं अब खुद से ही पढ़कर देखना चाहती हूँ कि बिना हेल्प के कैसा परफॉर्मेंस रहेगा मेरा । फिर अगले हफ्ते से ही एग्जाम्स शुरू हो रहें हैं अब एक हफ्ते में कितना ही कर लूंगी मैं !
एग्जाम्स पूरे एक महीने चलेंगे । अगर मैं रेगुलर आऊं तो एक पेपर के तुरंत बाद दूसरे पेपर की भी तैयारी करवाता रहूंगा ।

सर आपने पहले ही बहुत टाइम दिया है अपना ,अब और वक्त नहीं चाहिए । अगर टाइम मिले तो हफ्ते में एक- दो बार मेरे डाउट्स क्लियर करने आ सकते हैं बाकी मैं खुद कर लूंगी ।

ठीक है अगर तुम यही चाहती हो तो यही होगा । बस जाते हुए तुम्हें एक सलाह देना चाहूँगा कि चाहे कुछ भी हो जाए कभी किसी के हाथों की कठपुतली बन कर मत जीना ।
अन्विका इस पर कुछ न कह सकी । उसकी इस बात ने अन्विका की उदास आँखों में फिर से पानी की बूंदे छलका दी थीं।

अगले दिन दानियाल को घर में न पाकर विक्रांत थोड़ी सोच में पड़ गया । जब मधुर से उसने पूछा तब उसे मालूम हुआ कि दानियाल को रोज आने से अन्विका ने ही मना कर दिया है। विक्रांत का कोई इरादा नहीं था उससे बात करने का लेकिन उसकी इस नादानी पर उससे चुप भी न बैठा गया ।

अगले हफ्ते से तुम्हारे एग्जाम्स शुरू हो रहें हैं और तुमने दानियाल को घर आने से मना कर दिया है। क्या सोच कर तुमने ये फैसला ले लिया ? एक बार मुझसे पूछना तो चाहिए था ?
उन्हें मुझे गाइडेंस के लिए बुलाने से पहले तुमने मुझसे एक बार भी पूछा था ?

वो जरूरी था तुम्हारी पढ़ाई किए । मैं ऐसा नहीं चाहता था कि किसी भी वजह से तुम्हारे नंबर एग्जाम्स में कम आएं उसके बाद तुम मुझे ताने मारना शुरू कर दो । मेरी और उनकी बात तुम्हारे एंड टर्म तक के लिए हुई थी और तुमने पेपर से पहले….

मेरी पढ़ाई के लिए इतनी झूठी फिक्र दिखाने की जरूरत नहीं है। लेकिन जानकारी के लिए बता दूं वो हफ्ते में दो दिन अभी भी आएंगे।
तुम्हारी परेशानी क्या है यार ! मैं कुछ भी करता हूँ तुम्हें सब झूठ ही क्यों लगता है ?
पता नहीं ….। अन्विका का बोलते हुए गला भर आया तो वो वहाँ से हट गई ।

विक्रांत ने अपनी डेस्क ऑफिस के कोने में ही लगवा ली थी । इससे अन्विका को फाइल्स देखने और उसे भेजने का झंझट नहीं करना पड़ रहा था। बाकी के कामों पर भी विक्रांत ने अपनी ही पकड़ बना ली थी ताकि अन्विका पर ऑफिस का बर्डन न पड़े और वो चुपचाप पढ़ाई भी करती रहें ।

अन्विका ऐसा बिल्कुल नहीं चाहती थी क्योंकि उसे पता था ऑफिस में सब क्या बातें कर रहें हैं लेकिन विक्रांत से बातचीत न होने के कारण वो उसे मना भी नहीं कर पाई।

विक्रांत का पूरा फोकस अपने काम पर था और अन्विका का अपने एग्जाम्स पर ।
विक्रांत ने बस एक बार उसे बताया था कि उसके एग्जाम्स खत्म होने के बाद वो अपना डेस्क अरेजमेंट वापस दूसरे केबिन में करा लेगा । ये सुनकर अन्विका को थोड़ी राहत महसूस हुई थी ।

अन्विका के पहले एग्जाम में विक्रांत भी अपनी गाड़ी से उसके कॉलेज तक गया था ।
अपने पुराने दोस्तों से मिलने पर अन्विका चहक कर सबसे गले मिल रही थी । उसकी आँखों में विक्रांत को तारे झिलमिल करते दिखाई पड़े थे । उसके होठों पर बहुत ही प्यारी मुस्कान छाई हुई है। न जाने कितने दिन हो गएं हैं उसे ऐसा लापरवाह सा मुस्कुराता देख कर ।

जब अन्विका कॉलेज के अंदर चली गई तो विक्रांत भी ऑफिस के लिए निकल गया ।

शाम 7 बजे के करीब विक्रांत को मधुर की कॉल आती है और उससे बात करते ही वो ऑफिस से निकल पड़ता है ।

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अन्विका की कार और विक्रांत की कार एक साथ बंसल हाऊस के सामने रुकी ।
विक्रांत के आने की खबर मिलते ही बंसल साहब घबराते हुए घर के बाहर आएं ।

विक्रांत तुम्हें यहाँ आना मना है , तुम जानते हो न ? चौधरी के आदमी इस घर के चक्कर ही काटा करते हैं और तुम हो कि मुंह उठाए सीधा यहीं चले आए । जाओ वापस गाड़ी में बैठो। उन्होंने बहुत धीमी आवाज में विक्रांत को समझाया और फिर आवाज तेज करते हुए बोले –
मैंने सिर्फ इस लड़की को बुलाया था । उन्होंने अन्विका की ओर देखा तो वो खुद आगे बढ़कर खड़ी हो गई । उसका सर झुका हुआ था जैसे कोई बहुत बड़ा अपराध किया हो ।

सर आपने अन्विका मैडम को यहाँ पे क्यों बुलाया ?  विक्रांत अन्विका के बिल्कुल पीछे खड़ा हो गया ।
तुम्हें पता भी है कि आजकल ये क्या कर रही है ?
हाँ MBBS Finals की तैयारी कर रहीं हैं ताकि डॉक्टर बन सकें ।
तो तुम जानते थे ? फिर तुमने मुझे क्यों नहीं बताया ?

किसी दूसरे की पर्सनल लाइफ में क्या चल रहा है ये जानकार आप क्या करेंगे ? आपने जो काम इन्हें दिया है वो तो अच्छे से कर ही रहीं हैं।
तुम गधे को क्या ! तुम्हें एक बार में समझ नहीं आया कि पहले मैंने इसकी पढ़ाई क्यों छुड़वाई थी ? अगर ये हमारे आदमियों से दूर रही तो अपने दोस्तों को कुछ भी बता सकती है। चलो ये न भी बताए लेकिन मीडिया को भनक लग जाए तो ? वो सभी तो छाप देंगे कि मिस्टर बंसल की बहू सुपीरियर टेक छोड़ने की फिराक में है तब ?

आप मुझे एग्जाम्स देने दीजिए प्लीज। मैं न किसी से कुछ कहूंगी और न ये बात मीडिया तक ही जाएगी । अन्विका ने अपनी भर्राई  हुई आवाज में प्रकाश बंसल से रिक्वेस्ट की । उसकी आँखें छलछला आईं हैं। विक्रांत आया तो यहाँ अपने पापा से लड़ने ही आया था । लेकिन अन्विका की हालत देख कर समझ गया कि अगर उसके गुस्से की वजह से कहीं अन्विका के एग्जाम्स नहीं हो पाएं तो वो बिल्कुल टूट जाएगी। इसीलिए उसने खुद को शांत करने और बात बदलने की सोची ।

नहीं ऐसा कुछ नहीं होगा समझ गई तुम ….
पापा …! विक्रांत ने बीच में ही उन्हें टोक दिया ।

पापा मुझे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होता कि मैं किसी के अंडर काम करूं । ऑफिस में जो रुतबा मेरा होना चाहिए था वो अन्विका का है , लोग मुझे सैल्यूट करने से पहले इसके आगे झुकते हैं। ये सब देख कर मुझे जलन होती है। ये हाल तब है जब इसे ऑफिस का कोई काम नहीं आता अगर वो भी आ गया तो क्या होगा ? यही सोचकर मैंने ही इसे अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने को बोला है । न ये मेरे काम में दखलंदाजी करे और न मुझे जलन महसूस होगी ।

बेटा तुम भी कैसी छोटी छोटी बातों पर ध्यान दे रहें हो ! सबको तो नहीं मालूम लेकिन तुम तो जानते जो न कि ये तुम्हारी कर्मचारी है, फिर जलन किस बात की ? चौधरी वाला मामला निपटते ही सभी जान जाएंगे कि इस कंपनी के असली वारिस तुम ही हों….!

नहीं मुझे अब झूठी जी हुजूरी नहीं की जाएगी इनके आगे। आप सोच लीजिए या तो ये ही ऑफिस से अपना ध्यान हटा ले वरना मैं ही किसी दिन ऑफिस में अनाउंसमेंट करके इन्हें इनकी सही जगह दिखा दूँगा। आगे क्या करना है ये आपकी जिम्मेदारी पर है । चलो अन्विका ! विक्रांत ने सबके सामने अन्विका का हाथ पकड़ लिया और उसे कार में बिठा दिया ।

 

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